फोटो-20- सीएसएन पीजी कॉलेज। संवाद
हरदोई। महाविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण शिक्षण कार्य में बाधा हो रही है। महाविद्यालयों में जहां एक ओर डिजिटल इंडिया और कौशल विकास का प्रयास किया जा रहा है। वहीं महाविद्यालयों में बुनियादी शिक्षण कार्य के लिए गुरुजन ही उपलब्ध नहीं हैं। कई विषयों में शिक्षक न होने से विद्यार्थियों को बिना क्लास लिए ही परीक्षा देनी पड़ रही है।
जनपद में तीन राजकीय व दो अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय संचालित हैं। नगर में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में विज्ञान वर्ग की स्नातक व परास्नातक की शिक्षा की व्यवस्था है वहीं सीएसएन पीजी महाविद्यालय में कला व वाणिज्य वर्ग और आर्य कन्या महाविद्यालय में कला वर्ग की शिक्षा की व्यवस्था है। शहर के इन तीनों विद्यालयों के अलावा राजकीय महाविद्यालय पिहानी और राजकीय महाविद्यालय टोडरपुर में भी स्नातक के विभिन्न विषयों की शिक्षा की व्यवस्था है। विद्यार्थी राजकीय व एडेड विद्यालयों में प्रवेश को अधिक महत्व देते हैं और इन विद्यालयों में प्रवेश लेने वालों की संख्या अधिक रहती है। मगर इन महाविद्यालयों में शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। विषय विशेषज्ञ न होने से विद्यार्थियों को शिक्षण कार्य में समस्या आ रही है।
यह है महाविद्यालयों में शिक्षकों की स्थिति
सीएसएन महाविद्यालय में एक प्रोफेसर व 17 सहायक प्रोफेसर तैनात हैं। महाविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के 17 पद रिक्त चल रहे हैं। महाराणा प्रताप राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में एक प्रोफेसर और 24 सहायक प्रोफेसर तैनात हैं। वर्तमान में सहायक प्रोफेसर के छह पद रिक्त चल रहे हैं। आर्य कन्या महाविद्यालय में 10 सहायक प्रोफेसर तैनात हैं। छह पद रिक्त हैं। राजकीय महाविद्यालय टोडरपुर में निर्धारित 16 पद के सापेक्ष वर्तमान में छह सहायक प्रोफेसर तैनात हैं। इसमें भी एक को दूसरे विद्यालय से संबद्ध किया गया है। राजकीय महाविद्यालय पिहानी में 12 सहायक प्रोफेसर के सापेक्ष सात लोग तैनात हैं उनमें से दो गैर जनपद संबद्ध हैं। इसलिए सिर्फ पांच सहायक प्रोफेसर ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं।
महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति आयोग से होती है। प्रत्येक सत्र में शिक्षक आ रहे हैं मगर अभी भी शिक्षकों की कमी है। उसके विषय में शासन व विश्वविद्यालयों को नियमित सूचनाएं भेजी जाती हैं। -प्रो. कौशलेंद्र कुमार सिंह, प्राचार्य, सीएसएन पीजी कॉलेज