फोटो-32- कार्यशाला में जानकारी देतीं डॉ. कृति मौर्या। स्रोत: महाविद्यालय
हरदोई। बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निस्तारण पर मंगलवार को गौरा डांडा स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में कार्यशाला आयोजित हुई। माइक्रो बायोलॉजी विभाग की तरफ से आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने बायोमेडिकल वेस्ट के नुकसान गिनाते हुए सुरक्षित निस्तारण पर जोर दिया।
मेडिकल कॉलेज की एजुकेशन यूनिट के तत्वावधान में बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण विषय पर आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ प्राचार्य डाॅ. जेबी गोगोई ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि बायो वेस्ट का सुरक्षित निस्तारण न करने से पर्यावरण को खतरा होता है और संक्रमण बढ़ता है। विभाग की सहायक आचार्य व कार्यशाला संयोजक डाॅ. कृति मौर्य ने कहा कि बायोमेडिकल कचरे का वैज्ञानिक और सुरक्षित निस्तारण अस्पताल की कार्यप्रणाली का हिस्सा है।
समन्वयक डाॅ. पुष्पलता सचान ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाओं से स्टाफ को व्यावहारिक जानकारी मिलती है और रोगियों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है। डाॅ. अदिति गर्ग ने बायो मेडिकल कचरे के सुरक्षित प्रबंधन की आवश्यकता और व्यावहारिकता पर जानकारी दी।
कार्यशाला में 40 नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षण भी किया गया। प्रतिभागियों ने स्वयं अपशिष्ट पृथक्करण व निस्तारण की विधियों का अभ्यास किया। कार्यशाला में पैरामेडिकल डीन व दंत चिकित्सा विभागाध्यक्ष डाॅ. शिवम यादव, विभागाध्यक्ष इमरजेंसी डॉ. अमित आंनद, सर्जरी विभागाध्यक्ष डाॅ. बीएमएस पोखरिया मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. शैलजा ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. कृति मौर्य ने किया।