हरदोई। जिला महिला चिकित्सालय सहित 22 स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव की व्यवस्थाओं का स्वास्थ्य विभाग का दावा है। जबकि हकीकत इसके विपरीत है। जिला महिला चिकित्सालय सहित 11 ही बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं। इसमें भी कई का स्थानांतरण दूसरे जनपद को हो चुका है। इससे इन स्वास्थ्य केंद्नों पर भी पद रिक्त हो जाएंगे। वहीं ऑपरेशन जैसी स्थिति बनने पर एनेस्थीसिया के लिए एनेस्थेटिक ही नहीं हैं। ऐसे में एक तो गंभीर हालत और ऊपर से रेफर कर दिया जाता है। इससे तीमारदार खुद की रिस्क की प्रसव पीड़िता को जिला मुख्यालय तक लाने को विवश होते हैं।
सुरक्षित प्रसव के दावों और व्यवस्थाओं की पड़ताल में विभाग का सच सामने आया। स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रसव के दावों की पड़ताल में कहीँ बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं मिले तो, कहीं पर एनेस्थेटिक नहीं हैं। इससे प्रसव पीड़ित महिलाओं के साथ ही जच्चा-बच्चा तक की देखभाल की समस्याएं आ रही हैं। हरपालपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर लंबे समय से बोल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है। अधीक्षक डॉ. आनंद पांडेय ने बताया कि जनवरी से अब तक करीब 1,200 प्रसव कराए गए हैं। करीब 35 प्रसूताओं को रेफर किया गया है।
माधौगंज स्वास्थ्य केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। अधीक्षक डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सीएचसी पर प्रसव कराए जाते है। ऑपरेशन की स्थित में रेफर किया जाता है। जनवरी से अब तक करीब 25 प्रसव पीड़ित महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। संडीला सामुदायिक केंद्र पर भी बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त हो गया है। अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार सिंह ने बताया कि डॉ. रवि शुक्ला का स्थानांतरण उन्नाव हो गया है। जनवरी माह से अब तक 885 प्रसव कराए गए हैं।
सवायजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी बाल रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त है, लेकिन अधीक्षक डॉ. पराग कुमार ने प्रसव कराए जाने की जानकारी दी। बताया कि स्त्री प्रसूति रोग विशेषज्ञ भी तैनात नहीं हैं। प्रतिमाह औसतन 10 प्रसूताओंं को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है।
टड़ियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। महिलाओं के प्रसव कराए जाते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बहोरवा, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कालाआम में प्रसव कक्ष बने हैं। प्रसव भी कराए जाते हैं। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सुशील कुमार कनौजिया ने बताया कि काम चलाया जा रहा है।
हरियावां में सीएचसी प्रभारी डॉ. अंकुर कुमार ने बताया कि बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। एक माह में लगभग 100 प्रसव कराए जाते हैं। जच्चा-बच्चा को दिक्कत पर जिला महिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।
बिलग्राम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर सामान्य प्रसव होते हैं, यहां एनेस्थेटिक डाॅक्टर न होने से सिजेरियन प्रसव नहीं हो पाते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डाॅ. यदुराज तैनात हैं। अधीक्षक डॉ. हेमंत राजपूत ने बताया कि अब तक 65मरीजों को रेफर किया गया है।
कछौना सामुदायिक स्वास्थ केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ का पद खाली है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गैरी खालसा व टिकारी में प्रसव सुविधा है, लेकिन बाल रोग विशेष हैं न एनेस्थेटिक चिकित्स हैं। अधीक्षक डाॅ. शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि काम चलाया जा रहा है। मल्लावां की सीएचसी पर बालरोग विशेषज्ञ की तैनाती नही है। यहां पर महिलाओं के प्रसव कराए जाते हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पुरवावां, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, नसीरपुर में प्रसव कक्ष बने हैं। विभाग सुविधाओं का दावा भी करता है, लेकिन अस्पताल में प्रसव नहीं कराए जाते हैं। कोथावां में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रैया, कल्यानमल व न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेनीगंज में प्रसव नहीं करवाए जाते हैं। यहां से प्रसव पीड़िताओं को रेफर किया जाता है। शाहाबाद नगर के स्वास्थ्य केंद्र पर महिलाओं के सामान्य प्रसव ही कराए जाते हैं। केंद्र पर बाल रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ और सर्जन की तैनाती नहीं है। जनवरी से अब तक ऑपरेशन के लिए 32 केस रेफर किए गए। अधीक्षक डॉ. प्रवीण दीक्षित ने बताया अस्पताल में सामान्य प्रसव ही कराए जा रहे हैं।
पाली नगर के स्वास्थ्य केंद्र पर भी बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। डाॅ. आनंद शुक्ला ने बताया कि प्रत्येक माह करीब 400 प्रसव होते हैं। जनवरी से अभी तक करीब 57 प्रसव पीड़ित महिलाओं को रेफर किया गया है। बावन स्वास्थ्य केंद्र पर अधीक्षक डॉ. पंकज मिश्रा ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन यहां पर एनेस्थेटिक चिकित्सक नहीं है। जनवरी से अब तक 864 प्रसव पीड़िताओं को भर्ती किया गया, इसमें 119 महिलाओं की स्थिति गंभीर होने पर रेफर किया गया।
-
शासन के पोर्टल पर सभी चिकित्सकों का डाटा उपलब्ध है। चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रथम संदर्भन इकाई चिकित्सालयों पर संडीला को छोड़कर बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं।
- डॉ. भावनाथ पांडेय, सीएमओ