नवरात्र उत्सव में गुरुवार को मां कालरात्रि की पूजा
अर्चना की गई। मंदिरों से लेकर घरों में पुरोहितों ने मां का पूजन संपन्न
कराते हुए भगवती के सातवें स्वरूप कालरात्रि की महिमा को बताते हुए कहा कि
इनकी आराधना करने से समस्त भय का नाश होता हैं और सर्व मनोकामना पूर्ण होती
हैं।
मान्यता हैं कि नवरात्र में मां की आराधना करने से लोगों के सभी
कष्ट दूर होते हैं और लोगों को सुख-शांति की प्राप्ति होती हैं। गुरुवार
को मां कालरात्रि के स्वरूप की पूजा हुई। शास्त्रों के अनुसार मां
कालरात्रि का स्वरूप अंधकार की तरह काला है और इनके कंठ में चमकीली मुंडों
की माला है।
यह अपने भक्तों को सभी कष्टों से मुक्ति दिलाती हैं। भक्त गण
देर रात्रि तक इनकी आराधना करते हैं। यह अपने भक्तों की हर तरह से रक्षा
करने वाली देवी हैं। भक्तों को भय दूर करने वाली हर संकट हरने वाली तथा
दुष्टों को नाश करने वाली देवी मां काल रात्रि की हर तरफ जय जयकार हो रही
हैं।
नवरात्र के दौरान नियम एवं संयम से सभी को मां की आराधना करनी चाहिए।
मान्यता है कि मां के सच्चे दरबार में अर्जी लगाने वालों की अरदास अवश्य
पूरी होती हैं। सुख समृद्धि की कामना के साथ आज मां के भक्तों ने
श्रद्धा और विश्वास के साथ मां की आराधना की।
मां कालरात्रि को भय नाश एवं
कष्ट मोचक देवी मां के रूप में जाना जाता हैं। उधर, शास्त्री उमाकांत
अवस्थी ने मां भगवती के सातवें स्वरूप कालरात्रि की महिमा को बताते हुए क
हा कि इनकी पूजा से सर्वकार्य सिद्ध होते हैं। उन्होंने कहा कि मां के
मंत्रों के जप एवं नियम संयम से पूजा आराधना करने के मंत्र बताए।
प्रवचन के
माध्यम से धर्म की राह को सद्मार्ग बताते हुए ईश्वर की आराधना के महत्व को
बताया। उधर, नवरात्र पर्व की अष्टमी को लेकर गुरुवार को बाजार में पूजन
सामग्री खरीदने को खासी भीड़ रही। हवन संपन्न कराने के लिए पूजन सामग्री की
खरीद को लेकर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही।
फल, फूल, मिष्ठान तथा मेवा
एवं कलावा व अन्य सामग्री की लोगों ने खरीदारी की। आम की लकड़ियों की मांग
भी खूब रही। प्रमुख रूप से रोली, चंदन, चुनरी, फूल माला, पुष्प, फल एवं
मिष्ठान के साथ ही एवं नारियल, तूल, कलावा, गरी का गोला एवं पंचामृत बनाने
को मेवाओं की खरीदारी हुई।
इसके साथ ही पुरोहितों को दान में देने के लिए
वस्त्रों के अलावा मां के श्रंगार की सामग्री भी खरीदी गई। मां दुर्गा की
मूर्तियों एवं चित्रों के अलावा आम के पत्ते, केले के पत्ते दूब आदि जरूरी
सामग्रियों का भी पूजन के लिए संकलन किया गया। सांकल्य सामग्री भी खरीदी
गई। बड़ी तादाद में महिलाओं ने खरीदारी की।