फोटो 11: कैंटीन में पति विपिन के साथ काम करती सरोज। संवाद
बेहंदर। घर के चूल्हा-चौका और दहलीज से आगे बढ़कर कासिमपुर की सरोज ने प्रेरणा कैंटीन से जुड़कर आत्मनिर्भर और परिवार को समृद्ध बनाने का रास्ता तलाशा है। उन्होंने ब्लॉक में प्रेरणा कैंटीन के संचालन से अपने पति को भी रोजगार से जोड़ा है।
उप्र ग्रामीण आजीविका मिशन में स्वयं सहायता समूह महिलाओं को स्वावलंबन की राह दिखाने में सार्थक साबित हो रहे हैं। महिलाओं ने रोजगार कर अपनी तकदीर को संवारा, घर का सहारा भी बनी हैं। कासिमपुर गांव निवासी सरोज ने बालाजी आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह बनाया। इसकी वह स्वयं अध्यक्ष हैं। उन्होंने महिलाओं को साथ जोड़ा और बचत कर समूह को समृद्ध बनाया। उन्होंने स्वरोजगार स्थापना का मन बनाया और ब्लॉक में प्रेरणा कैंटीन का संचालन शुरू किया। अब वह 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह बचत कर लेती हैं।
बताया कि उनके साथ पति विपिन देते हैं। दो साल पहले पति विपिन को पैरालाइसिस अटैक आया इसके बाद पति ने काम-धंधा बंद कर दिया। परिवार चलाने में काफी दिक्कत होने लगी। बच्चों की अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए उन्होंने साल-2024 में ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर बालाजी समूह बनाया। सरोज के मुताबिक, पति की बीमारी के कारण घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन कैंटीन में आने के बाद उनके परिवार की स्थिति में सुधार हुआ और चार बच्चों की पढ़ाई भी सुचारू हो गई है। समय के साथ समृद्धि आ रही है। समूह से जुड़ी महिला अनुपमा देवी, मंजू, बिट्टो देवी, रामरानी, सुनीता, सोनी देवी, राजकुमारी, शिव देवी ने सिलाई-कटाई और कढ़ाई का काम शुरू किया जिससे उनकी भी आर्थिक स्थिति अब ठीक होने लगी है।