हरदोई। परिसीमन के बाद संडीला विधानसभा सीट का भूगोल तो बदल गया, लेकिन 55 साल बाद भी समीकरण नहीं बदले। यहां मुद्दों को हाशिये पर रखकर हर बार हार-जीत वोटों के ध्रुवीकरण से तय होती है।
1962 में पहली बार अस्तित्व में आई संडीला सीट सुरक्षित रही। 1967 में सामान्य श्रेणी में आने के साथ ही यहां ध्रुवीकरण की राजनीति शुरू हो गई। संडीला विधानसभा सीट पर हमेशा मुस्लिम उम्मीदवार विनर या रनर रहे हैं।
14 चुनाव में सात बार मुस्लिम विधायक निर्वाचित हुए। संडीला से चार बार कुदसिया बेगम, तीन बार कुंवर महावीर सिंह व तीन बार अब्दुल मन्नान विधायक चुने गए।
कुदसिया बेगम व अब्दुल मन्नान ने जीत की हैट्रिक भी लगाई है। 1967 में जनसंघ के काशीनाथ ने निर्दलीय प्रत्याशी ए जब्बार को 3,738 वोट से पटकनी दी थी।
अगले चुनाव में कांग्रेस की कुदसिया बेगम ने काशीनाथ को 76 वोट से हरा दिया था। 1974 में कांग्रेस ने कुदसिया का टिकट काटकर निहाल अजमत चौधरी को मैदान में उतारा।
काशीनाथ ने 18,976 वोट हासिल कर निहाल अजमत चौधरी को 5,973 मतों के अंतर से पराजित किया। 1977 में कांग्रेस ने कुदसिया को टिकट नहीं दिया तो निर्दलीय मैदान में उतर जनता पार्टी से प्रत्याशी काशीनाथ को 4,816 वोट के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।
इस बार कांग्रेस उम्मीदवार छेदीनाथ साथी 8,656 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। 1980 और 1985 में कुदसिया बेगम ने भाजपा के सुरेंद्र दुबे को हराकर जीत की हैट्रिक लगाई।
दो बार हार का मुंह देख चुके सुरेंन्द्र दुबे ने 1989 में जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत का स्वाद चखा। उन्होंने कुदसिया बेगम को 5,270 वोट से हराया।
1991 और 1993 की रामलहर में भाजपा की नाव पर सवार होकर महावीर सिंह विधानसभा पहुंचे। 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव में उतरी सपा प्रत्याशी अजीज हसन खां 3306 वोट से हारकर रनर रहे।
वहीं पहली बार चुनाव लड़े निर्दलीय प्रत्याशी अब्दुल मन्नान 22,427 वोट हासिल कर तीसरे स्थान पर रहे। 1996, 2002 व 2007 में अब्दुल मन्नान ने बसपा से चुनाव जीत कर हैट्रिक लगाई।
2012 में परिसीमन के बाद संडीला विस का भूगोल तो बदला, लेकिन समीकरण जस के तस रहे। अबकी भाजपा छोड़ सपा में आए कुंवर महावीर सिंह ने 84,644 वोट हासिल कर बसपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री अब्दुल मन्नान को 19,134 वोट से हराया।
राष्ट्रीय लोकमंच के प्रत्याशी मनोज अर्कवंशी 16,060 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस की इशरत रसूल 6,883 मत पाकर चौथे स्थान पर रहीं। इस चुनाव में भाजपा की स्थिति बेहद खराब रही।
भाजपा के वेदव्रत बाजपेई को 1,525 वोट मिले और आठवें स्थान पर रहे। 2017 में मोदी लहर में भाजपा प्रत्याशी राजकुमार अग्रवाल ने 90,362 वोट हासिल कर बसपा छोड़ सपा से लड़े अब्दुल मन्नान को 20,403 वोट से पराजित किया।
20 साल बाद खुला था सपा का खाता
1993 में पहली बार मैदान में आई सपा का खाता संडीला विधानसभा सीट में 20 साल बाद खुला। 2012 के चुनाव में भाजपा छोड़ सपा में आए कुंवर महावीर सिंह ने सपा को पहली जीत दिलाई।
सपा को भले ही संडीला से सिर्फ एक बार जीत हासिल हुई हो, लेकिन यहां के एक चौथाई से ज्यादा वोट पर हमेशा उसका कब्जा रहा है।
सपा को 1993 में 26.20 प्रतिशत, 1996 में 28.48 प्रतिशत, 2002 में 26.13 प्रतिशत, 2007 में 43.56 प्रतिशत, 2012 में 43.87 प्रतिशत व 2017 में 35.49 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं।
अबकी ये प्रत्याशी हैं मैदान में
भाजपा से अलका अर्कवंशी, सपा-सुभासपा गठबंधन से सुनील सिंह अर्कवंशी, बसपा से अब्दुल मन्नान, कांग्रेस से मोहम्मद हनीफ, आप से रघुवीर यादव, सोशलिस्ट पार्टी से मुन्ना लाल
निर्दलीय नरेश सिंह, एआईएमएईएम से रफीक लंबू, निर्दलीय ललित कुमार, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी से अभिनय गुप्ता।
वोटरों के जातिगत आंकड़े
ब्राह्मण- 40,000, ठाकुर- 41,000, मुस्लिम- 40,000, आरख- 40,000, जाटव- 30,000, पासी- 23,000, कुशवाहा/मार्य/शाक्य/सैनी- 21,000, निषाद/कश्यप/केवट- 11,000,
यादव- 15,000, लोधी- 13,000, पाल- 12,000, वैश्य- 10,000, धोबी- 4,000, कायस्थ- 4,000, जायसवाल/कलवार- 3,500, प्रजापति- 3,000, ,सक्सेना/भुर्जी- 2,500, बाल्मीकि- 2,000
(उपरोक्त हैं अनुमानित आंकड़े)