शारदा नहर में पानी न आने से क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। किसानों का कहना है कि इस समय गेहूं की 50 फीसदी बुवाई हो चुकी है। जो फसल बोई जा चुकी है, वह जमाव ले चुकी है। इसके लिए खेतों को पानी की दरकार है।
शारदा नहर क्षेत्र के महरी, कटका, सेमरा, समसपुर, कलौली, गोहानी, अंटा, सुन्नी, ज्ञानपुर, जब्बरखेड़ा व पंचमपुर समेत अन्य कई गांवों के नजदीक से गुजरती है। किसानों का कहना है कि गेहूं की बुवाई से पहले खेतों की सिंचाई कर उनकी परहनी करनी है। खेतों में पानी नहीं लग पा रहा है।
जिससे सिंचाई लेट हो रही है। किसान राजेश, मंशाराम, अनूप व सियाराम आदि ने बताया कि नहर मेें पानी न आने के कारण किसान मजबूरन पंपिंग सेट समेत अन्य संसाधनों से खेतों में पानी लगा रहे हैं। खेतों की सिंचाई करने पर उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
जब बुवाई का समय गुजर जाएगा, तब नहर में पानी छोड़ा जाएगा। इसका कोई लाभ किसानों को नहीं मिलेगा।
कछौना निवासी किसान उमेश सिंह ने बताया कि ये पहली बार नहीं है, जब जरूरत के वक्त किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है। लगभग हर साल किसानों को इन्हीं हालतों का सामना करना पड़ता है। जिम्मेदारों को इस पर ध्यान देना चाहिए।
महरी गांव निवासी किसान विकास कुमार ने बताया कि नहर में पानी न आने के कारण फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान पंपिंग सेट व ट्यूबवेल से फसलों की सिंचाई कर रहे हैं। उन्हें अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है।
समसपुर गांव निवासी जयराम ने बताया कि सिंचाई विभाग अपनी सुविधा अनुसार ही नहर में पानी छोड़ने का शेडयूल बनाता है। इस शेडयूल में किसानों के हितों की अनदेखी की जाती है। साल में एक या दो बार ही ऐसा होता है कि नहर में छोड़ा गया पानी किसानों को लाभ पहुंचा सके।
नादखेड़ा गांव निवासी गुड्डू ने बताया कि अभी लगभग गेहूं की आधी बुवाई बाकी है। अगर अब भी नहर में पानी आ जाए तो बड़ी संख्या में किसान लाभान्वित हो सकते हैं। बताया कि अधिकारियों से कई बार कहा जा चुका है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
किसानों की सुविधा को ध्यान में रखकर ही शेड्यूल निर्धारित किया जाता है। तय शेडयूल के अनुसार शारदा कैनाल में तीन दिसंबर से पानी छोड़ा जाएगा। जनपद में पानी की उपलब्धता 6-7 दिसंबर से होगी। नहर में लगभग तीन सप्ताह तक पानी रहेगा। अखिलेश गौतम, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग