हरदोई। शासन के निर्देशों को धता बताकर मनरेगा के सामग्री अंश का भुगतान करने में मनमानी करने वाले आठ खंड विकास अधिकारियों को शासन ने कठोर चेतावनी दी है। तय सीमा से कहीं ज्यादा का भुगतान करने का गंभीर मामला महज कठोर चेतावनी के साथ ही खत्म भी हो गया है। खास बात यह भी है कि ज्यादातर खंड विकास अधिकारियों ने इसे तकनीकी त्रुटि बताकर पल्ला झाड़ लिया और उनके इस तर्क को शासन में बैठे वरिष्ठ अफसरों ने स्वीकार भी लिया।
मनरेगा के सामग्री अंश का भुगतान करने के लिए 10 सितंबर 2025 को केंद्र सरकार ने सेंट्रल पूल से बजट जारी किया था। इसकी सूचना पूर्व में ही सभी जिलों के अफसरों को दे दी गई थी। चार सितंबर 2025 को पत्र भेजकर जिला और ब्लॉकवार अधिकतम भुगतान की सीमा भी तय कर दी थी। शासन से तय की गई सीमा को आधार बनाते हुए तत्कालीन सीडीओ सान्या छाबड़ा ने सभी खंड विकास अधिकारियों को भी पत्र भेजा था। तय सीमा से अधिक भुगतान किसी भी हाल में न करने के निर्देश दिए थे।
बावजूद इसके शाहाबाद, पिहानी, कोथावां, बेहंदर, हरियावां, संडीला, कछौना, बावन में तय सीमा से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया था। 15 सितंबर 2025 के अंक में
अमर उजाला में इसका खुलासा करते हुए खबर प्रकाशित की गई थी। खबर का संज्ञान लेकर न सिर्फ शासन स्तर से बल्कि सीडीओ ने भी जांच के आदेश दिए थे। 11 माह की जांच का नतीजा कठोर चेतावनी के रूप में सामने आया है। आठों विकास खंडों में तैनात रहे तत्कालीन खंड विकास अधिकारियों को ग्राम्य विकास विभाग के संयुक्त आयुक्त नागेंद्र मोहन राम त्रिपाठी ने कठोर चेतावनी जारी की है।
बचाव में दिए कैसे-कैसे तर्क
.आम तौर पर इंटरनेट की स्पीड कम होने पर भुगतान अटक जाता है। शाहाबाद के बीडीओ दिनेश शर्मा ने कुछ इसी तरह का तर्क जांच के दौरान दिया। इंटरनेट की स्पीड धीमी होने और तकनीकी कारणों से 15.73 लाख रुपये का भुगतान ज्यादा होने का तर्क उन्होंने उच्चाधिकारियों को दिया है।
.संडीला की तत्कालीन बीडीओ प्रतिमा शर्मा ने भी तकनीकी कारणों का हवाला देकर 25.96 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हो जाने का तर्क दिया है। कुछ इसी तरह का तर्क बावन के खंड विकास अधिकारी राम प्रकाश ने भी दिया है। उन्होंने भी ज्यादा भुगतान की वजह तकनीकी समस्या बताई है।
पिहानी के तत्कालीन बीडीओ और अब सीतापुर के मछरेहटा के बीडीओ अरुण कुमार ने भी तकनीकी खामी की वजह से ज्यादा भुगतान होने का तर्क उच्चाधिकारियों को दिया है।
कोथावां के तत्कालीन बीडीओ सुरेंद्र सिंह राणा अब हरपालपुर के बीडीओ हैं। उन्होंने भी नेट और सर्वर की समस्या के कारण ज्यादा भुगतान होने का तर्क दिया है।
हरियावां के तत्कालीन बीडीओ और जिला प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. रत्नेश सिंह ने सर्वर और इंटरनेट की खामी के कारण त्रुटिवश भुगतान हो जाने का तर्क उच्चाधिकारियों को दिया था।
.कछौना के बीडीओ महेश चंद्र ने तो जवाब में पूरी बात ही पलट दी। लिख भेजा कि राजकीय इंटर कॉलेज खजोहना की चारदीवारी का भुगतान जरूरी था। सीआईबी और मॉडल शॉप का भुगतान करने के लिए भी पत्र आ रहे थे। इनका भुगतान कर दिया इसलिए तय सीमा से 13.75 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान हो गया।
किसने कितना ज्यादा किया था भुगतान
.बावन विकास खंड में भुगतान के लिए अधिकतम सीमा 171.01 लाख रुपये थी। यहां 238.55 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 67.54 लाख रुपये ज्यादा का भुगतान हुआ था।
.संडीला विकास खंड में अधिकतम भुगतान 83.83 लाख रुपये स्वीकृत था। यहां 109.79 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 25.96 लाख रुपये का अधिक भुगतान हुआ था।
.शाहाबाद विकास खंड में 86.22 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान हो सकता था। यहां भी 101.95 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। 15.73 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया गया था।
.कछौना में 19.77 लाख रुपये की सीमा भुगतान के लिए तय थी। यहां 33.52 लाख रुपये का भुगतान हुआ। तय सीमा से 13.75 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ था।
.बेहंदर में 58.35 लाख रुपये का भुगतान अनुमन्य था। यहां 68.03 लाख रुपये का भुगतान हो गया। बेहंदर में 9.68 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान किया गया है।
.हरियावां विकास खंड में 73.03 लाख रुपये का भुगतान करने की अनुमति थी। यहां भी 81.67 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। तय सीमा से 8.64 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ।
.कोथावां विकास खंड में 50.40 लाख रुपये का अधिकतम भुगतान किया जा सकता था। यहां 58.16 लाख रुपये का भुगतान हुआ। 7.76 लाख रुपये का ज्यादा भुगतान हुआ है।
.पिहानी में 50.21 लाख रुपये का भुगतान अनुमन्य था। यहां 68 हजार रुपये ज्यादा का भुगतान हो गया था।