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Hardoi News: साइनस को नजरअंदाज किया तो खत्म हो जाएगी सूंघने की क्षमता

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फोटो-03- मेडिकल कॉलेज में युवती का स्वास्थ्य परीक्षण करते डॉ. विवेक कुमार। संवाद
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हरदोई। धुंध और सर्दी की वजह से खांसी, जुकाम, गले में खराश से साइनसाइटिस के मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। ईएनटी ओपीडी में साइनस के मरीज तेजी से बढ़े हैं। इनमें नाक बंद होने, सिरदर्द, चेहरे में दर्द, आंखों में जलन और नाक से पानी बहने की समस्या से लोग पीड़ित हैं। समय रहते इलाज न कराया जाए तो पीड़ित के सूंघने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। सर्दी में इजाफा होने से हवा में नमी की कमी हो जाती है। इस कारण साइनस के रोगी बढ़ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज की नाक, कान व गला की ओपीडी में रोजाना 10 से 12 मरीज साइनस से पीड़ित होकर आ रहे हैं। ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेक सिंह ने बताया कि हवा में नमी कम होने से नाक और गले की नलिकाएं सूख जाती हैं। इस कारण साइनस कैविटी में बलगम जम जाता है, जो संक्रमण को बढ़ाता है। साइनस रूम में हवा भरी होती है इसी कारण नाक की हड्डी टेढ़ी हो जाती है या फिर सूजन आ जाती है तो हवा का वेंटिलेशन रुक जाता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। यह समस्या एलर्जी, प्रदूषण और धूल के संपर्क में आने से भी हो जाती है। लापरवाही बरतने पर यह साइनसाइटिस का रूप ले लेती है। इससे रोगी की सूंघने की क्षमता समाप्त हो जाती है। जिन लोगों को पहले से एलर्जी, दमा या नाक में टेढ़ी हड्डी की समस्या है उन्हें सर्दी के मौसम में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।


साइनस समस्या के लक्षण
साइनल में लगातार सिरदर्द महसूस हो सकता है खासकर सुबह उठते समय। चेहरे के कुछ खास हिस्सों में भी दर्द या दबाव महसूस हो सकता है। अन्य लक्षणों में भरी हुई नाक और गाढ़ा, पीला बलगम शामिल है। जो इस बात का संकेत है कि आपका शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा है। आपको सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता भी कम हो सकती है जो साइनस की समस्या का एक और लक्षण है। ऐसी समस्या होने पर चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।
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इन बातों का रखें ध्यान
-ठंडे मौसम में सिर और नाक ढककर रखें।

-धूल, धुआं और तेज खुशबू से दूर रहें।

-नियमित भाप लें।

-नाक को नम रखने के लिए स्लाइन वाटर का प्रयोग करें।

-दिन में पर्याप्त पानी पीएं।

-बार-बार जुकाम होने पर एंटीबायोटिक स्वयं न लें।
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