महिला सशक्तीकरण पर रविवार को सेंट जेम्स में आयोजित
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अदिती गौड़ ने कहा कि एक समय था जब महिलाएं खुद
सहारे को तरसती थी और आज का समय है कि वह अपने परिवारों का सहारा बनकर बेटी
नहीं बेटों की भूमिका में नजर आ रही हैं।
ग्रामीण अंचलों से पहुंची
महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं को लेकर सम्मान दिलाने के लिए
निर्धारित किए गए दिवसों की सार्थकता सही मायने में तभी होगी, जब विश्व भर
में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी।
सिस्टर
एल्बीना ने कहा कि नारी पूजनीय है, इस पंक्ति की सार्थकता हमारा समाज जब
समझेगा जब महिलाएं अपने आप को मानसिक रूप से स्वतंत्र समझ सके। उन्हें कोई
प्रताणित न करें। जहां उन्हे ंदहेज के लालच में उन्हें जिंदा न जलाया जाए।
बताया कि कार्यक्रम में उन समूहों को भी विशेष कर आमंत्रित किया गया,
जिन्होंने अपने आप को कमजोर पाते हुए एकजुट होकर सशक्त बनने का सफल प्रयास
किया तथा नारियों के लिए एक प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई हैं। संचालन
लीलावती ने किया।
इस दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिलाओं के समूहों को
सम्मानित भी किया गया। सिस्टर रानी, सुजाता, वैनी सहित काफी संख्या में
महिलाएं मौजूद रही। उधर, महिला समूहों ने नाटक मंचन व गीतों से कार्यक्रम
प्रस्तुत किया तथा कन्या भ्रूण हत्या की ओर सभी का ध्यान आकर्षित करने एवं
सभी की जिम्मेदारियों के प्रति आगाह करने का प्रयास कर डाला।
उन्होंने
लोगों से व अस्पताल संचालकों से उम्मीद की कि भ्रूण हत्या कराने को नर्सिंग
होम पहुंचने वालों की सूचना तत्काल स्वास्थ्य विभाग के साथ बड़े अफसरों को
दी जाए, ताकि समाज के ऐसे लोगों के खिलाफ की कार्यवाही सुनिश्चित की जा
सके।
कन्याओं की घटती आबादी की ओर चिंता दर्शाते हुए भी समूहाें की ओर से
कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। उधर, महिला सशक्तीकरण की अलख जगाने वाली
महिलाओं के समूह चांदनी, किरन, दुर्गा, शक्ति, ज्योति, लक्ष्मी को सम्मानित
किया गया।