परिषदीय स्कूलों में बिजली वायरिंग में हुए खेल से
करोड़ों खर्च के बावजूद बच्चे गर्मी में पसीना बहाएंगे। उनको न तो पंखे की
हवा मिल सकेगी और न ही कक्षा में प्रकाश व्यवस्था का लाभ ही मिल सकेगा।
स्कूलों की वायरिंग जहां उखड़ चुकी है, वहीं पंखे व ट्यूब लाइट नदारद हैं,
जबकि बिजली बिल पर भी प्रतिवर्ष लाखों रुपये व्यय किए जा रहे हैं।
इस पर
विभाग ने आख्या तलब की है। ज्ञात हो कि परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले
बच्चों को बिजली की सुविधा देने को वर्ष 08-09 में विद्युतीकरण योजना शुरू
की गई थी। जिसके तहत विभाग को निर्देशित किया गया था कि बिजली विभाग में
पंजीकृत संस्थाओं से ग्राम शिक्षा समिति द्वारा बिजली वायरिंग कराई जाए और
ग्राम शिक्षा समिति को उपकरण खरीदने थे।
इसके बाद विभाग को बिजली महकमे को
सूची भेज बिजली कनेक्शन कराने थे। शासन से निर्देश थे कि विद्युतीकरण के
कार्य का केंद्रीयकरण न किया जाए, पर विभागीय मिलीभगत से चहेती संस्थाओं से
स्कूलों को विद्युतीकरण करा दिया गया। इससे मानक विहीन वायरिंग की गई, जो
एक बार शुरू होते ही जल गई।
स्कूलों में निर्धारित कंपनी के पांच-पांच पंखे
व पांच-पांच ट्यूब लाइट लगाई जानी थी, पर वह सभी लोकल लगा गोलमाल किया
गया। विभागीय अफसरों ने प्रधानाध्यापकोें से दबाव बनाकर संस्थाआें को
भुगतान करा दिया। नतीजतन स्कूलों में कागजों मेें तो विद्युतीकरण हो गया,
पर उसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है।
इस बार गर्मी में
विद्यार्थियों को फिर बेहाल होना पड़ेगा, जबकि विभाग बिजली बिल पर भी
प्रतिवर्ष लाखों रुपये व्यय कर रहा है। इस बाबत शासन ने जिले के स्कूलों से
आख्या तलब की है। इससे विभाग में हड़कंप है। उधर, बिजली वायरिंग के लिए
विभाग की ओर से प्रति स्कूल 29,500 रुपये व्यय किए गए हैं।
अब तक स्कूलों
के विद्युतीकरण पर चार करोड़ 89 लाख 11 हजार रुपये व्यय हो चुके हैं। इसके
अलावा प्रति वर्ष साठ हजार रुपये का बिल अदा किया जा रहा है। उधर, स्कूलों
में बिजली वायरिंग के साथ पांच सीलिंग फैन लगाए गए हैं।