हरदोई। पिछले 115 वर्षों से देश के कोने-कोने तक जनपद की पहचान बनी ऐतिहासिक रामलीला और नुमाइश इस बार चुनावी महाकुंभ के बाद ही सज सकेगी।
रामलीला कमेटी ने 16 फरवरी को भूमि पूजन कर रामलीला व नुमाइश के शुभारंभ के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी।, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा संसाधनों की चुनाव में व्यस्तता का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
अब यह तय हो गया है कि चुनाव के बाद ही रामलीला व प्रदर्शनी शुरू हो सकेगी। जिले में एक परंपरा की तरह सजने वाली नुमाइश अबकी लगभग एक महीने की देरी से लगेगी।
अमूमन जनवरी माह के आखिरी सप्ताह में इसका भूमि पूजन हो जाता है। जनवरी जाते-जाते नुमाइश मैदान खेल-खिलौनों की दुकानों से भर जाता है। छोटे-बड़े झूले, मौत का कुआं और जादूगरों का खेल-तमाशा लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगता है।
खासकर बच्चों में इसकी दीवानगी देखी जाती है। फरवरी माह के पहले सप्ताह में ही नुमाइश अपने पूरे रंग में आ जाती है। होली वाले दिन तक यहां बच्चे-बूढ़े और जवान सभी निगाहें लगी रहती हैं, लेकिन इस बार चुनाव प्रक्रिया के चलते नुमाइश का शेड्यूल एक माह देर हो गया है।
जिले में 23 फरवरी को मतदान होना है। इसके बाद ही सुरक्षा बलों की चुनावी व्यस्तता कम होगी। लिहाजा, 23 फरवरी के बाद ही नुमाइश लगाने की अनुमति मिल सकेगी।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष रामप्रकाश शुक्ला ने बताया कि कमेटी ने 16 फरवरी को भूमि पूजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन चुनाव में सुरक्षा संसाधनों की व्यस्तता से फिलहाल अनुमति नहीं मिली है। चुनाव के बाद ही नुमाइश व रामलीला शुरू हो सकेगी।
बड़ी दूर से आते हैं, हुनर संग लाते हैं
115 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक नुमाइश का इंतजार यहां के लोग यूं ही शिद्दत से नहीं करते। यही एक मौका होता है, जब उनके बीच देश के कोने-कोने से हुनरमंदों की महफिल सजती है।
यहां कश्मीर की वादियों से लेकर असम तक के निर्मित उत्पाद मिलते हैं। कश्मीर की पशमीना शाल, असम के कारीगरों की शिल्पकारी से सजे बर्तन और मुरादाबादी फर्नीचर नुमाइश की शोभा बढ़ाते हैं।
हाथों की कला को मिलता प्रोत्साहन
नुमाइश में हथकरघा उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है। शासन की योजनाओं से पोषित हो रहे हथकरघा कारोबार के कारीगरों की नायाब कारीगरी यहां देखने को मिलती है।
जिले के कई क्षेत्रों में महिला समूहों द्वारा हाथ से बनाए गए मिट्टी के बर्तन, कपड़े, बेड शीट, अगरबत्ती, धूपबत्ती जैसे उत्पादों के स्टाल भी लगाए जाते हैं। नुमाइश में इन उत्पादों की अच्छी बिक्री होती है।
कवि सजाते महफिल, सुरों से सजती शाम
गंगा-जमुनी तहजीब की गवाह ऐतिहासिक नुमाइश में एक शाम कवियों के नाम होती है, तो दूसरी रात को शायरों की महफिल सजाई जाती है। कवियों और शायरों की रचनाओं का आनंद नुमाइश में लोगों को मिलता है।
कला प्रेमियों के लिए नुमाइश का यह मंच बेहतरीन नगीने चुनकर लाता है। यहां के कवि सम्मेलन और मुशायरे में मंजर भोपाली, वसीम बरेलवी, गजेंद्र प्रियांशु जैसे बड़े शायर और कवि शिरकत कर चुके हैं।
सन्नाटे में बीत रहा प्यार का सप्ताह
सात फरवरी से 14 फरवरी तक वेलेंटाइन वीक में प्रेमी जोड़े नुमाइश की कमी महसूस कर रहे हैं। हर वर्ष इन तारीखों को गुलाबी बनाने में नुमाइश की भूमिका अहम रहती है।
कई नई जोड़ियों के प्यार और इकरार का भी गवाह यह मेला बनता रहा है। नई जोड़ियों की आमद यहां देखी जाती है। वेलेंटाइन डे वाले दिन सबसे ज्यादा नए जोड़े नुमाइश का आनंद लेते नजर आते हैं।