हरदोई। भरावन विकास खंड की ग्राम पंचायत लोधौरा में नींव स्तर तक बने पंचायत भवन के लिए छत स्तर तक का भुगतान किए जाने और फिर दूसरी जगह पंचायत भवन का निर्माण शुरू कराए जाने पर डीएम और सीडीओ ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम अविनाश कुमार ने सीडीओ आकांक्षा राना के माध्यम से पूरे मामले पर आख्या तलब की है।
पंचायत चुनाव से पहले ग्राम लोधौरा में पंचायत भवन का निर्माण शुरू हुआ था। नींव स्तर तक का निर्माण कराने के बाद छत स्तर तक का भुगतान कर दिया गया था। पांच लाख 25 हजार 156 रुपये सामग्री अंश पर और 7035 रुपये मजदूरी अंश पर खर्च किए गए हैं। पंचायत चुनाव हो जाने के बाद गांव की सत्ता बदलने पर पंचायत भवन को अधूरा छोड़ दूसरे स्थान पर निर्माण शुरू कर लिया गया था।
19 जुलाई के अंक में अमर उजाला ने पूरे मामले का खुलासा किया था। खास बात यह है कि ग्राम सचिव संजीव त्रिपाठी ने फर्जी हस्ताक्षर बनाकर भुगतान निकाले जाने की शिकायत की थी। पूरे मामले पर डीएम अविनाश कुमार और सीडीओ आकांक्षा राना ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम और सीडीओ ने पंचायत भवन के निर्माण को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी गिरीशचंद्र से पूरी आख्या तलब की है।
डीपीआरओ गिरीशचंद्र ने बताया कि डीएम और सीडीओ को पूरे मामले की पत्रावली व आख्या दे दी जाएगी। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक इस मामले की जांच मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल से भी कराई जा सकती है, क्योंकि पूरा भुगतान मनरेगा से ही हुआ है।
खुलासा : तत्कालीन प्रधान के ईंट भट्ठे को किया भुगतान
पंचायत भवन के निर्माण में सामग्री अंश के नाम पर पांच लाख 25 हजार 156 रुपये का भुगतान किया गया है। इनमें तत्कालीन ग्राम प्रधान राजाराम मिश्रा के ईंट भट्ठे केदार ब्रिक फील्ड को 49644 रुपये और 1,04,682 रुपये का भुगतान किया गया है। इसके अलावा जय मां वैष्णों ट्रेडर्स गोडवा के नाम 1,46,708 रुपये और 1,33,071 रुपये का भुगतान किया गया है। एक अन्य फर्म लता हार्डवेयर को भी 91,049 रुपये का भुगतान हुआ है।
प्रधान का कार्यकाल खत्म होने के बाद हुआ भुगतान
पूरे प्रकरण में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आया है। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल गत वर्ष 25 दिसंबर को खत्म हो गया था। पंचायत भवन के निर्माण का भुगतान 27 दिसंबर 2020 को हुआ है। माना जा रहा है कि विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से पूरा खेल हुआ है और अब इसका ठीकरा ग्राम सचिव और तत्कालीन प्रधान पर ही फोड़ा जा रहा है।
बिना एमबी के ही हो गया भुगतान
पूरे मामले को लेकर ग्राम सचिव संजीव कुमार त्रिपाठी ने उच्चाधिकारियों से भी गंभीर शिकायत की है। शिकायत में ग्राम सचिव ने फर्जी हस्ताक्षर कर तत्कालीन प्रधान और उनके पुत्र द्वारा भुगतान करा लिए जाने और मामले में ब्लाक के अधिकारियों कर्मचारियों की मिलीभगत होने की बात लिखी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना एमबी के ही भुगतान हो जाने की बात भी ग्राम सचिव ने लिखी है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर खंड विकास अधिकारी और ब्लाक के मनरेगा लेखाकार ने किस आधार पर भुगतान कर दिया।