संडीला। ग्राम पंचायत अलावलपुर में जंगल झाड़ी के खाते में दर्ज सार्वजनिक जमीन को तहसील कर्मियों से मिलकर बेच दी गई। खरीदने वालों ने दाखिल खारिज कराए बिना ही जमीन पर दुकानें बनवा लीं। मामले में प्रधान व ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय से शासन स्तर तक शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
अलावलपुर में गाटा संख्या 587 रकबा 0.2700 हेक्टेयर ग्राम पंचायत की भूमि जंगल झाड़ी के खाते के नाम पर दर्ज है। इस जमीन का पहले अनुसूचित जाति के त्रिलोकी पुत्र निंजा के नाम पट्टा हुआ था।
त्रिलोकी की मौत के बाद वरासत उनकी पत्नी फूलमती के नाम हो गई। फूलमती ने 23 मई 2020 को रामकली व अजय कुमार के नाम शर्ती बैनामा कर दिया।
वहीं दाखिल खारिज कराए बिना रामकली व अजय ने इस जमीन पर 9 दुकानें बनवा दी। यह निर्माण पंचायत चुनाव के दौरान हुआ। मामले में प्रधान वारिस अली, रामपाल, रजत, नसीम व हैदरअली ने कई शिकायतें डीएम, एसपी, मुख्यमंत्री, थानाध्यक्ष तक से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मामले में सब रजिस्ट्रार अनुपम सिंह का कहना है कि उन्हें बैनामा करने का अधिकार है। क्योंकि यह शर्ती बैनामा है। इसके साथ जमीन की खतौनी लगी है, उसमें जमीन फूलमती के नाम असंक्रमणीय भूमिधर के रूप में दर्ज है।
एसडीएम डीपी सिंह ने बताया कि जमीन के संबंध में एक मुकदमा त्रिलोकी बनाम सरकार के नाम से धारा 229 बी के तहत हुआ था लेकिन जमीन जंगल झाड़ी की होने के कारण यह मुकदमा 2018 में खारिज हो चुका है।
तहसीलदार अंबिका चौधरी का कहना है कि इस जमीन के संबंध में मुकदमा सरकार बनाम रामकली के नाम से धारा 104 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 के तहत उनके न्यायालय में विचाराधीन है। इसमें पेशी की तारीख 5 मई है। इस धारा के अंतर्गत बैनामा या अंतरण शून्य करने का वाद सरकार की तरफ से योजित किया गया है।