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लाखों का कारोबार मगर व्यवस्था बेजार !

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फोटो-10- फल सब्जी मंडी का चोक पड़ा नाला । - फोटो : HARDOI
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हरदोई। शहर की इकलौती फल-सब्जी मंडी में हर माह लाखों का कारोबार होता है। इसके बाद भी यहां व्यवस्थाएं बेजार है। हालत ये है कि फल और सब्जियों का कचरा सड़क पर पड़ा रहता है।
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जलनिकासी के नाले और नालियां चोक होने से बारिश का पानी सड़क पर भर जाता है। जिसके चलते बारिश में मंडी परिसर में छई छप्पा छई छपक के छई जैसे हाल के बीच किसान एवं व्यापारी खरीद फरोख्त करते है। इसके बाद भी मंडी में आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार बेखबर हैं।
लखनऊ रोड स्थित गल्लामंडी परिसर से सटी फल सब्जी मंडी की शुरूआत वर्ष 2010 में हुई थी। करीब 20 बीघा क्षेत्रफल में विकसित की गई इस मंडी में एक ही सड़क है।
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सड़क के एक ओर करीब 40 पक्की दुकानें है शेष लगभग 50 से 55 व्यापारी राउटीनुमा डेरा लगाकर यहां पर कारोबार कर रहे है। 176 व्यापारियों ने कारोबार का लाइसेंस ले रखा है मगर सभी के लिए व्यापार करने से लेकर किसानों के बैठने के लिए न तो छांव सहित स्थान विकसित किए गए न ही पेयजल आदि के लिए समुचित व्यवस्था है।
मंडी में सुबह से ही कारोबार शुरू हो जाता है जो कि दोपहर तक चलता रहता है। इस बीच हजारों किसान यहां फल सब्जी बेंचने के लिए आते है।
यहां कारोबार पर मंडी शुल्क के रूप में आलू पर डेढ़ प्रतिशत एवं अन्य फल सब्जियों के लिए एक प्रतिशत कर लिया जाता है। इस कर से मंडी समिति की हर वर्ष 30 लाख के लगभग आय होती है।
मंडी की स्थापना के बाद से यहां विकास कार्यों की बात करें तो सड़कों में गड्ढ़े है और किसानों के बैठने के लिए छांव वाला स्थान तक नहीं है। शीतल पेयजल की व्यवस्था तो दूर हैंडपंप तक खराब हैं। इतना ही नहीं मवेशी यहां भोजन पानी की तलाश में दिन भर मंडराते रहते है। गेट पास आदि से लेकर सुरक्षा के इंतजाम को लेकर भी बेपरवाही है।
दूसरे जिले जाने को मजबूर किसान
फल सब्जी मंडी में सुविधाओं के नाम पर किसानों के हाथ खाली है। किसानों के लिए विश्राम स्थल तो दूर बैठने की ही समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां एक मात्र सड़क है जिसमें डिवाइडर बना हुआ है। पक्की दुकानें न होने से सड़कों पर मंडी लगती है। इस कारण किसानों को वाहनों के साथ दुकानों तक पहुंचना मुश्किल होता है। किसान राम बहादुर, सर्वेश ने बताया कि यहां जगह कम है। इस कारण कटरी क्षेत्र के अधिकांश किसान कन्नौज एवं फर्रुखाबाद की मंडियों में जाने को मजबूर होते है। सबसे ज्यादा दिक्कते आलू एवं आम के सीजन में आती है।
15 से 20 एकड़ भूमि की और जरूरत
जिस तरह से पिछले 10 वर्षों में मंडी में किसानों का आना जारी है। उसके अनुसार मंडी को बडे़ स्तर पर बनाये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए कम से कम 15 से 20 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। जिस तरह से किसान बाजार के लिए मंडी की ओर से निजी क्षेत्र के लोगों से भूमि खरीदी गई थी। ठीक उसी प्रकार यदि आस पास कहीं भूमि की उपलब्धता बने तो इस ओर मंडी प्रशासन शासन को प्रस्ताव भेज सकता है। फिलहाल यहां व्यापार करने वाले व्यापारी इस मसले पर कुछ बोलने से परहेज करते है।
बोले किसान नेता
किसान नेता एवं भारतीय कृषक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरोज दीक्षित ने कहा कि जिले में किसान आम की बागवानी, आलू की खेती के साथ पलेज में तरबूज, खरबूजा आदि के अलावा सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। ऐसे में शहर की इस इकलौती मंडी का विस्तार समय की मांग के अनुसार आवश्यक है ताकि किसानों को पर्याप्त स्थान एवं सुविधाएं मिल सकें।
वर्जन
बारिश से पहले ही नाले को साफ करा दिया जाएगा। पेयजल के लिए वाटर कूलर लगाने एवं बारिश में सड़क पर पानी न भरे इसके लिए सड़क को ठीक करने सहित आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए मंडी परिषद निर्माण शाखा को पत्र भेजे गए थे। आवारा मवेशियों को पशु आश्रय स्थल भेजने के लिए ईओ को पत्र भेजा गया है। यह सही है कि मंडी के लिए बड़े परिसर की आवश्यकता है। इस ओर यदि जिला मुख्यालय के आस पास ग्राम समाज या निजी क्षेत्र से 15 से 20 एकड़ भूमि उपलब्ध हो जाने की जानकारी मिलेगी तो बातचीत कर नियमानुसार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। - बबलू कुमार, सचिव, मंडी समिति

फोटो-11- मंडी परिसर में खाना पानी की तलाश में घूमते मवेशी ।- फोटो : HARDOI

फोटो-12- मंडी की सड़क पर फैला कचरा ।- फोटो : HARDOI

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