हरदोई। चकबंदी के दौरान रकबा बढ़ाने के नाम पर एक किसान से 80 हजार रुपये लेखपाल ने ठक लिए। मामले में कोर्ट के आदेश पर 11 साल पुलिस ने लेखपाल के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की है।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव पाटकुंआ निवासी राजवीर सिंह ने कोर्ट में दिए प्रार्थना पत्र में बताया था कि वर्ष 2011 में उसके गांव में चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी। चकबंदी कार्यालय के लेखपाल रविंद्र सिंह की ड्यूटी लगी थी।
शहर के मोहल्ला सिविल लाइन निवासी बेटी रंजना के घर में चकबंदी कार्यालय में तैनात कर्मचारी किराये पर रहता था। वहां लेखपाल रविंद्र कर्मचारियों के साथ आता था।
रविंद्र ने खुद को चकबंदी लेखपाल बताकर उसे झांसे में लेकर गांव में चकबंदी के दौरान उसकी भूमि का मूल्यांकन कर दो गुनी करने की बात कहकर 80 हजार रुपये की मांग की।
इस पर उसकी पत्नी अनुज लता ने रिश्तेदार से 5 प्रतिशत ब्याज पर 80 हजार रुपये लाकर लेखपाल को दिए थे। 15 दिन का समय देने के बाद काम न होने पर रुपये वापस मांगे, तो लेखपाल ने एक इंतखाब उसे दी।
जिसकी जांच कराने पर इंतखाब फर्जी निकली। उसने रुपये मांगे, तो वह धमकी देने लगा। उसने कोतवाली, एसपी कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया था। कहीं उसकी फरियाद नहीं सुनी गई थी।
इसके बाद उसने कोर्ट में गुहार लगाई। कोतवाल संजय पांडेय ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर लेखपाल के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।