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भुगतान पाने वाली फर्मों के सत्यापन में कांप रहे अफसरों के हाथ

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हरदोई। मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री का भुगतान पाने वाली फर्मों (वेंडर्स) का सत्यापन कराने में खंड विकास अधिकारियों के हाथ कांप रहे हैं। दो बार सीडीओ के स्तर से सत्यापन कराए जाने के बाद भी महज एक ब्लाक से ही आधी अधूरी सत्यापन रिपोर्ट आई। अब मनरेगा उपायुक्त ने एक बार फिर सभी खंड विकास अधिकारियों से मनरेगा की सामग्री अंश का भुगतान पाने वाली फर्मों के सत्यापन कर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को लिखा है।
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ग्रामीण इलाकों में अधिक से अधिक लोगों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मनरेगा का संचालन होता है। मनरेगा के तहत कराए जाने वाले कार्यों में सामग्री अंश और मजदूरी अंश का भुगतान करने की व्यवस्था है। साठ फीसदी भुगतान मजदूरी अंश पर और चालीस फीसदी भुगतान सामग्री अंश पर किया जा सकता है। सामग्री अंश का भुगतान पाने वाली फर्माें का सत्यापन कराने के निर्देश शासन स्तर से दिए गए थे। इसके बावजूद जनपद में फर्मों का सत्यापन नहीं कराया गया।
सात नवंबर 2020 और 18 फरवरी 2021 को तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी ने सभी खंड विकास अधिकारियों को फर्मों का सत्यापन करने के निर्देश दिए थे। काफी मशक्कत के बाद सिर्फ टोडरपुर विकास खंड के खंड विकास अधिकारी ऋषि पाल सिंह ने आख्या भेजी, लेकिन यह भी आधी अधूरी आई। अब एक बार फिर मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने सभी खंड विकास अधिकारियों को मनरेगा के सामग्री अंश का भुगतान पाने वाली फर्मों का सत्यापन कर एक सप्ताह में आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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1219 फर्मों को हुआ है 73 करोड़ रुपये का भुगतान
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2020-21 में जनपद में मनरेगा से सामग्री अंश के नाम पर 72 करोड़ 98 लाख 89 हजार रुपये का भुगतान हुआ है। कुल 19 विकास खंडों की 1219 फर्मों को यह भुगतान किया गया है। सबसे अधिक भुगतान शाहाबाद की 91 फर्मों को हुआ है। इन फर्मों को 13 करोड़ 78 लाख 51 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। भरखनी की 125 फर्मों को आठ करोड़ 65 लाख 41 हजार रुपये का भुगतान हुआ है।
किस ब्लाक में कितनी फर्मों को कितना हुआ भुगतान
ब्लाक फर्मों की संख्या भुगतान
अहिरोरी 29 151.1
बावन 83 201.53
बेंहदर 65 333.26
भरावन 72 445.93
भरखनी 124 865.41
बिलग्राम 61 179.72
हरियावां 79 464.65
हरपालपुर 41 179.37
कछौना 24 46.16
कोथावां 30 116.59
माधौगंज 37 206.22
मल्लावां 40 80.62
पिहानी 72 161.35
सांडी 76 244.79
संडीला 65 521.16
शाहाबाद 91 1378.51
सुरसा 83 730.79
टड़ियावां 67 384.94
टोडरपुर 80 606.79
नोट : भुगतान की राशि लाख रुपये में
इनसेट
सत्यापन में यह मांगी जा रही है जानकारी
फर्म का नाम
फर्म का पता
पंजीकरण के आधार पर कारोबार का विवरण
जीएसटीएन नंबर
मोबाइल नंबर
अकाउंट नंबर
आधार नंबर
पैन नंबर
इनसेट
सत्यापन से इसलिए बच रहे जिम्मेदार
सामग्री अंश की खरीद और भुगतान में लंबा खेल होता है। खंड विकास अधिकारी इन फर्मों के सत्यापन से इस लिए भी बच रहे हैं कि अधिकांश फर्में कागजों पर चल रही हैं या फिर मनरेगा से जुड़े कर्मचारियों के परिजनों के नाम से ही इनका संचालन हो रहा है। मनरेगा उपायुक्त ने भले ही एक बार फिर से सत्यापन आख्या मांगी हो, लेकिन निर्धारित अवधि में आख्या मिलना बेहद मुश्किल है।
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि खंड विकास अधिकारियों को पत्र भेजकर वेंडर (फर्म) सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट नहीं मिली, तो विभागीय उच्चाधिकारियों से कार्रवाई की संस्तुति कर दी जाएगी।
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