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बुंदेली पत्थर से बने चेकडैम सहेजेंगे पानी

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ग्राम किन्हौटी में निर्माणाधीन चेक डैंम। संवाद - फोटो : HARDOI
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हरदोई। नालों में बहकर बर्बाद होने वाले बारिश के पानी को बचाने के लिए बुंदेली पत्थरों से चेकडैम बनाए जा रहे हैं। बुंदेली पत्थरों से चेकडैम बनाने में लागत तो कम हुई ही है, साथ ही मजबूती में भी ये बेमिसाल होंगे। इससे इनकी उपयोगिता लंबे समय तक बनी रहेगी। फिलहाल जिले में छह चेकडैम बनाए जा रहे हैं। बरसाती नालों पर मनरेगा से बन रहे ये चेकडैम लघु सिंचाई विभाग बनवा रहा है।
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पानी के अंधाधुंध दोहन से शहर ही नहीं ग्रामीण इलाकों का भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। ग्रामीण इलाकों में तेजी से गिर रहे भूजल स्तर का कारण बारिश का पानी नालों के जरिये बह जाना बताया गया था। बारिश का पानी बर्बाद होने से बचाने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए नालों पर चेकडैम बनाए जा रहे हैं। चेकडैम मजबूत हों और इसकी उपयोगिता लंबी समय तक बनी रहे, इसके लिए बुंदेली पत्थरों को लगाया जा रहा है। बुंदेली पत्थरों की खासियत यह है कि ये पानी के बहाव में घिसते नहीं हैं। इससे ये लंबे समय तक बने रहे हैं। जिले के पांच विकास खंडों के छह गांवों में चेकडैम का निर्माण शुरू करा दिया गया है। चेकडैम का निर्माण मनरेगा के बजट से कराया जा रहा है और इसकी निगरानी लघु सिंचाई विभाग कर रहा है। सभी चेकडैम बरसाती नालों में बनाए जा रहे हैं, ताकि बरसाती जल को ही सहेजा जा सके। विभागीय सूत्रों के मुताबिक बारिश शुरू होने से पहले सभी चेकडैम बनकर तैयार हो जाएंगे।
इन गांवों में बन रहे चेकडैम
ब्लाक गांव
सुरसा अंधर्रा
पिहानी जमुही
शाहाबाद कोर्डा सरैंया
टड़ियावां जपरा
संडीला मीननगर अजिगवां, किन्हौटी
मनरेगा उपायुक्त प्रमोद सिंह चंद्रौल ने बताया कि चेकडैम का निर्माण बारिश के पानी की बर्बादी रोकने और भूजल संरक्षण के उद्देश्य से कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि चेकडैम बारिश का पानी सहेजने में काफी कारगर साबित हुए हैं। पानी के संकट से जूझ रहे बुंदेलखंड में बड़ी संख्या में चेकडैम बनाए गए हैं। इसका वहां के भूजल स्तर पर काफी असर भी पड़ा है। अब जिले में भी चेकडैम बनाकर बारिश के पानी को सहेजने की कवायद हो रही है।
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इसलिए इस्तेमाल किया जा रहा बुंदेली पत्थर
लघु सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पवन कुमार ने बताया कि चेकडैम के निर्माण में ईंट की जगह बुंदेली पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बुंदेली पत्थर ईंट की अपेक्षा सस्ता पड़ता है। ईंट से बनने वाले चेकडैम से बुंदेली पत्थर से बनने वाले चेकडैम की लागत करीब दस फीसदी कम आएगी। खास बात यह है कि पानी में बुंदेली पत्थर खराब नहीं होता। इससे चेकडैम लंबे समय उपयोगी बने रहेंगे, जबकि ईंटें पानी के बहाव में कट जाती हैं।
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