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Hardoi News: शासन ने मांगी 1.30 लाख बोरी डीएपी, कम होगी किसानों की परेशानी

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हरदोई। सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं के पास पर्याप्त डीएपी उपलब्ध होने के बावजूद किसान परेशान हैं। किसानों की दिक्कतों को देखते हुए प्रशासन ने शासन से 1.30 लाख बोरी डीएपी की मांग की है। वहीं, शासन ने एक रैक का आवंटन कर दिया है। इसमें से आधी रैक लखनऊ जनपद को दी जाएगी। आधी जिले को मिलेगी। इसके बाद खाद की दिक्कत कम हो जाएगी। वहीं, रविवार को भी कई केंद्रों पर खाद का वितरण किया गया, जबकि कई केंद्र बंद रहे।
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किसानों को सहकारी समिति और केंद्रों पर डीएपी मिलने में आ रही दिक्कत को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसका संज्ञान लेते हुए डीएम एमपी सिंह ने समितियों से ही किसानों को डीएपी दिलाने के लिए कदम उठाए हैं। उन्होंने शासन ने नवंबर माह में वितरण के लिए दो रैक डीएपी की मांग की है।
बताया कि अक्तूबर के बचे दिनों के लिए भी डीएपी की मांग की गई है। शासन ने एक रैक का आवंटन जारी किया है। जिसमें 2,600 मीट्रिक में से 1,300 मीट्रिक टन का हरदोई और 1,300 मीट्रिक टन लखनऊ जनपद के लिए आवंटन किया है। 1,300 मीट्रिक में टन में 26,000 बोरी डीएपी अक्तूबर में मिलने की उम्मीद है। सहकारिता के सहायक आयुक्त आशीष मेहता ने बताया कि 62 समिति और 11 पीसीएफ केंद्र पर मांग के अनुरूप डीएपी की आपूर्ति कराई जा रही है। 26,000 बोरी डीएपी मिल जाने से समितियों पर डीएपी की कमी नहीं रहेगी।
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कई सहकारी केंद्रों पर अवकाश के दिन भी बंटी खाद
किसानों को डीएपी देने के लिए अवकाश बावजूद रविवार को कई सहकारी विक्रय केंद्रों का संचालन किया गया। एक आधार पर दो बोरी डीएपी किसानों को दी गई। हालांकि जिन समितियों पर डीएपी नहीं थी, वहां पर किसानों को मायूस होना पड़ा। कछौना की मतुआ समिति के सचिव पंकज सिंह ने बताया कि 300 बोरी डीएपी आई है। शनिवार को भी 300 बोरी बांटी गई थीं। शाहाबाद क्षेत्र में खाद वितरण केंद्रों पर ताला लटकता रहा। इसके चलते किसानों को लौटना पड़ा। साप्ताहिक बंदी के कारण साधन सहकारी समिति शाहबाद व आगमपुर, नवीन मंडी में इफको किसान सेवा केंद्र बंद रहे। बिलग्राम क्षेत्र में डीएपी की किल्लत बरकरार है। पीसीएफ खाद केंद्र प्रभारी अवध बिहारी ने बताया कि 600 बोरी डीएपी मिल गई है। सोमवार को वितरण केंद्र पर होगा।
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दिसंबर तक होती है गेहूं की बुवाई कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीपीएन गौतम और उप निदेशक कृषि डॉ. नंद किशोर ने बताया कि राई, सरसों और आलू की बुवाई के लिए अक्तूबर माह अनुकूल है। रबी की मुख्य फसलों में चना, मटर, मसूर, गेहूं और जौ की सामान्य बुवाई पूरे नवंबर में होती है। आलू की कच्ची फसल की खोदाई के बाद भी दिसंबर में गेहूं की पिछैती बुआई की जाती है।
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