भारतीय संस्कृति के रक्षक, महान देशभक्त और सिखों के
दसवें गुरु गोविंद सिंह की जयंती पर रविवार को जिले भर में कार्यक्रमों की
धूम रही। गुरुद्वारों में जहां एक ओर सबद कीर्तन व भंडारे का दौर दिन भर
चला, वहीं दूसरी ओर कई संस्थाओं द्वारा श्रद्धापूर्वक जयंती मनाकर
श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके बताए रास्तों पर चलने का आह्वान किया गया।
गुरु
गोविंद सिंह के 348वें प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारे के मुख्यग्रंथी कुलवंत
सिंह, लखवीर सिंह, अजीत सिंह के जत्थे ने स्थानीय गुरुद्वारे में सिख संगत
को गुरु गोविंद सिंह के उपदेशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत वर्ष की
धरती धन्य है, जहां गुुरु गोविंद सिंह जैसे तपस्वी व्यक्ति का अवतार हुआ,
वह धरती हमेशा हरी भरी रहेगी।
गुरु गोविंद सिंह ने अधर्मों का नाश करके
हिंदू राष्ट्र को अपवित्र होने से बचाकर हमें सबको धर्म के रास्ते पर चलने
की शिक्षा दी। अजीत सिंह ने अपने सबद कीर्तन से संगत को भाव विभोर कर दिया।
उन्होंने सबद गायन करते हुए हर सच्चे तख्त रचाया, सत संगत मेला...। प्रकाशोत्सव
पर विशेष रूप से आए करनाल सिगड़ा से बाबा गुरमेज सिंह, बाबा स्वर्ण सिंह
के जत्थे ने वाह वाह गोविंद सिंह आपे गुरु चेला...गाकर सभी को भाव विभोर कर
दिया।
प्रकाशोत्सव स्थानीय गुरुद्वारा गुरुनानक देव नई बस्ती में बड़ी
धूमधाम से मनाया गया। गुरु साहिब के दरबार हाल में उपस्थित फूलों से सजी
पालकी साहिब में विराजमान गुरु ग्रंथ साहब के सामने माथा टेक कर खुशियां
प्राप्त की। इस अवसर पर गुरुद्वारे के प्रधान ने उपस्थित संगत को गुरु पर्व
की शुभ कामनाएं दी।
अंत में आनंद साहब का पाठ उपरांत अरदास में शामिल होकर
समूह संगत ने देश के भले के लिए अरदास की। इसके बाद नगर के कई धर्मों
के अनुयायियों ने एक पंक्ति में बैठकर गुरु का लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
इसके बाद लंगर का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर काफी पर काफी संख्या में
श्रद्धालु मौजूद थे।