प्रतिबिंब सांस्कृतिक एवं सामाजिक अकादमी की ओर से
आयोजित ‘पुण्यात्मा गिरीश चंद्र बाजपेयी स्मृति व्याख्यान माला’ में मुख्य
अतिथि प्रोफेसर एके सिंह ने आर्थिक विकास की चुनौतियों पर व्याख्यान में
निष्कर्ष निकाला कि आर्थिक विकास के मुद्दे पर राजनीतिक दलों की ओर राजनीति
नहीं होनी चाहिए, तभी सही ढंग से देश और प्रदेश में आर्थिक विकास संभव हो
सकेगा।
उन्होंने कहा कि यूपी में विकास का पहिया कांग्रेेस, सपा, भाजपा
और बसपा की राजनीति में फंसकर रह गया और अब इससे उबरने की जरूरत है।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रोफेसर द्वारा गिरीश चंद्र बाजपेयी के चित्र पर
माल्यार्पण कर की गई। कहा कि आर्थिक दृष्टि से यूपी को न के वल चार बीमार
राज्योें में गिना जाता है, वरन स्थिति बिहार से भी कमजोर माना जा रहा।
आंध्र प्रदेश में जहां नायडू के समय विकास दर बढ़ी, वहीं गुजराज में मोदी
के समय विकास की दर बढ़ी।
इन लोगों ने अपने अपने प्रदेश में विकास को
मुद्दा बनाया। कहा कि लालू की तुलना में बिहार में भी नीतीश ने विकास को
मुद्दा बनाया और आर्थिक विकास किया, पर यूपी में न तो प्रारंभिक 20 वर्षों
में नेहरू के समय विकास की दर बढ़ी, न ही उसके बाद सपा, बसपा, भाजपा सरकार
के कार्यकाल में। कहा कि धर्म जाति की राजनीति से विकास का मुद्दा
प्रभावी मुद्दा नहीं बन सका और यूपी के विकास की दर राजनीति के मकड़जाल में
फंसकर रह गई।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की आर्थिक
स्थिति अच्छी नहीं है, देश में यूपी का स्थान 14वां है, जहां साक्षरता मेें
30 प्रतिश्त लोग अनपढ़ है, वहीं जनसंख्या वृद्धि दर ज्यादा होने और शिशु
मृत्यु दर सबसे ज्यादा होने को भी आर्थिक पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार
ठहराया। प्रतिबिंब अध्यक्ष अरुणेश बाजपेयी ने प्रोफेसर को स्मृति चिन्ह
देकर सम्मानित किया। ‘पुण्यात्मा गिरीश चंद्र बाजपेयी’ का परिचय डा. आलोक
टंडन तथा प्रोफेसर एके सिंह का परिचय डा. एसएस अग्निहोत्री ने दिया। संचालन
सचिव अनील श्रीवास्तव ने किया।
इस मौके पर नीलम सिंह, अरुण मिश्र, आनंद
गुप्ता, मनमन श्रीवास्तव, एसके पांडेय, रामऔतार शुक्ल, टीपी सिंह, आकृति
श्रीवास्तव, डा. संदीप सिन्हा, कमलेश पाठक, डा. अशोक शुक्ला, आरके पांडेय,
आनंद शुक्ला, डा. एसके सिंह आदि मौजूद थे। उधर, प्रतिबिंब संस्था द्वारा
आगामी वर्ष 15 में छात्रवृत्ति शोध छात्रों के लिए देने की घोषणा की गई।
यह
छात्रवृत्ति शोध छात्रों को प्रतीक बाजपेयी स्मृति छात्रवृत्ति के रूप में
10 हजार की प्रदान की जाएगी। उधर, कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर एके
सिंह ने वर्ष 1950-51 में हरदोई से जुड़ी यादों को ताजा करते हुए कहा कि उस
समय उनके पिता भगवंत सिंह हरदोई के डीएम थे।