सूचना के अधिकार में मांगी गई सूचनाओं में यदि गलत,
आधी, अधूरी या भ्रामक सूचना दी गई हो तो आवेदनकर्ता आयोग से सीधे धारा 18
के अधीन शिकायत कर परिवाद दायर कर सकता है।
कलक्ट्रेट में चकबंदी कोर्ट
के समक्ष सकारात्मक सुधार संस्थान के तत्वावधान में लगे शिविर में प्रबंधक
राधेश्याम कपूर ने यह बात सूचना के अधिकार के तहत जानकारी लेने आए लोगों
से कही। बताया कि किसी भी प्रकार की सूचना प्राप्त करने को आवेदन संबंधित
विभाग के जन सूचना अधिकारी को 10 रुपये देय शुल्क के साथ देने का प्रावधान
है।
यदि जन सूचना अधिकारी धारा-7 की व्यवस्था के अनुरूप आवेदन देने के 30
दिन के अंदर सूचना मुहैया न कराएं तो धारा 19 के तहत उसी विभाग के वरिष्ठ
अधिकारी अपील प्राधिकारी को जन सूचना अधिकारी के खिलाफ अपील करनी चाहिए।
डा.
दिनेश शंकर दबे ने कहा कि एक्ट की धारा 20 में आयोग को दो तरह की दंडात्मक
कार्रवाई करने का अधिकार है। यदि 30 दिन के अंदर सूचना नहीं मिलती, तो
25,000 तक का जुर्माना किया जा सकता है। आयोग इन स्थितियों में जिम्मेदार
अफसर पर लागू सेवा नियमों के अधीन अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करेगा।
जिलाध्यक्ष शिवमंगल दीक्षित ने कहा कि एक लंबे संघर्ष के बाद जनता को यह
जानने का हक मिला है और उसके हक की जिम्मेदारी आयोगों को सौंपी गई है।
आयोगों को अपना काम पूरी निष्ठा से करना चाहिए। इस मौके पर नानकचंद्र
मौर्य, मुकेश बाथम, सुरेंद्र यादव, मुन्नालाल, रामचंद्र, वीरभान, मोतीलाल
आदि मौजूद थे।