गंगा की अविरलता और निर्मलता को बचाने एवं हिमालय को
राष्ट्रीय पटल पर लाने को गंगोत्री से शुरू हुआ राष्ट्रीय हिमालय नीति
अभियान गुरुवार को जिले में भी पहुंचा। अभियान के चलते एक बैठक भी थमरवा
में आयोजित हुई, जहां लोगों को अभियान से जुड़कर गंगा की पवित्रता को बचाने
को प्रेरित किया।
राष्ट्रीय हिमालय नीति अभियान गंगोत्री से शुरू होकर
गुरुवार को जिले पहुंचा। जिले में सर्वोदय आश्रम में समाज सेविका उर्मिला
श्रीवास्तव एवं पूर्व प्रधानाचार्य विजय भाई ने स्वागत किया। इसके बाद
आदर्श इंटर कालेज थमरवा में बैठक हुई, जिसमें समाजसेवी उर्मिला श्रीवास्तव
ने कहा कि यह अभियान ऐसे समय में चल रहा, जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए काम कर रहे हैं।
इससे पूर्व भी
पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के समय गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित
किया जा चुका है, पर गंगा जिस हिमालय से आती है, वहां पर वर्तमान में जिस
तरह की मानवीय गतिविधियां हैं, उससे गंगा में पवित्र जल रहेगा कि नहीं इस
पर विचार करने की आवश्यकता है।
हिमालय से निकलने वाली कई हिमपोषित एवं
वर्षापोषित नदियों की जल राशि पिछले 50 वर्षो में आधी रह गई है। जलवायु
संकट बढ़ रहा है। ग्लेशियर प्रतिवर्ष 20 मीटर पीछे हट रहे हैं। हिमालयी
राज्यों में पिछले 20 वर्षो में 25 बार आपदा आ चुकी है।
हिमालय में चार धाम
की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्री अब असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पूर्व
प्रधानाचार्य विजय भाई ने कहा कि हिमालय में जंगल कम हो रहे हैं। हिमालयी
राज्यों को ऊर्जा प्रदेश घोेषित करके केवल बिजली देने वाले राज्यों के रूप
में चिह्नित हो रहे हैं।
इन परिस्थितियों ने हिमालय में बाढ़ एवं भूस्खलन
की भयानक स्थिति ला दी है। अभियान से जुड़े सुरेश भाई व केएल बंगोत्रा ने
कहा कि हिमालय नीति अभियान में कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरणविद्
शामिल हैं। स्थान स्थान पर अभियान से जुड़े साथियों का स्वागत किया जा
रहा है।
हिमालय को पहली बार राष्ट्रीय पटल पर लानेे को समग्र हिमालय नीति
की मांग उठाई जा रही है। इस मौके पर भगवान सिंह सहित कई समाजसेवी और
कार्यकर्ता मौजूद थे।