बिलग्राम। गेहूं और धान की परंपरागत खेती से हटकर किसानों की रुझान हरी सब्जियों की पैदावार की ओर बढ़ा है। इसके चलते हरी सब्जियों के साथ ही क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मटर की खेती भी की जा रही है। मटर की पैदावार अच्छी होने से दूसरे जिलों तक यहां की मटर की धूम है। जानकारी मिली है कि बांदा व बरेली की मंडियों में भी यहां मटर भेजी जा रही है। किसानों का कहना है कि मटर की खेती से आमदनी अच्छी हो रही है।
बिलग्राम नगर के अंदर स्थित खेतों के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन दिनों सफेद फूलों के बीच खेत मटर की फलियों से लदे खड़े हैं। फसल तैयार हो गई है, इस लिए बाजार में आवक भी जोर पकड़ चुकी है। मटर की फसल बाजार में आने के बाद स्थानीय आढ़तियों की दुकानें गुलजार हो चुकी है। क्षेत्र में उपजने वाली मटर की बिक्री व आपूर्ति का दायरा भी जिले से आगे बढ़ चुका है। हरदोई मंडी समेत यहां उपजने वाली मटर लखनऊ, सितारगंज, नानपारा, बरेली व बांदा आदि जिलों में भी मटर की आपूर्ति होती है। इसी के चलते बाजार में मटर की आवक तेज होने के बाद बाहरी व्यापारियों ने भी क्षेत्र में डेरा डाल दिया।
कोई स्थानीय आढ़तियों के माध्यम से खरीद कर रहा है तो किसी ने सीधे किसानों से संपर्क कर खेत में फसल को खरीदना शुरू कर दिया है। मटर की पैदावार करने वाले किसान सर्वेश, हरिश्चंद्र, महीपाल व सलीम आदि ने बताया कि अच्छी आय होने के चलते किसानों का रुझान मटर की खेती की ओर बढ़ा है। वर्तमान समय में काफी बड़े क्षेत्र फल में मटर की खेती की जा रही है। बताया कि गेहूं के बाद मक्का उपजाने वाले किसानों को बीच में दो माह का समय मिलता है। यह समय मटर की फसल के उत्पादन के लिए काफी मुफीद है। यही वजह है कि खेत खाली होती ही किसान इसे अतिरिक्त फसल के रूप में उपजाते हैं, इससे उन्हें अच्छी आय होती है। बताया कि मटर की फसल कुछ ही दिनों में कट जाएगी, इसके बाद पर्याप्त समय मिलता है जिसमें किसान गेहूं की फसल भी आसानी से कर लेते हैं।
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कसान हरिश्चंद्र ने बताया कि एक एकड़ क्षेत्रफल में मटर की फसल करने पर लगभग बीस हजार रुपये तक की लागत आती है। एक एकड़ में उत्पादन लगभग 18 से 20 क्विंटल तक होता है। बताया कि इन दिनों स्थानीय बाजार में मटर 2 हजार रुपये क्विंटल तक बिक रही है। इस हिसाब से कुल फसल 36 से 40 हजार रुपये तक की बिक रही है। बताया कि बाहर की मंडियों में मटर की प्रति क्विंटल कीमत 25 सौ रुपये तक है। जो किसान बाहर की मंडियों में फसल बेंचते हैं वह और अधिक लाभ पाते हैं।