जिला अस्पताल में ज्वाइनिंग के दौरान स्वास्थ्य
फिटनेस प्रमाण पत्र को शिक्षा मित्रों को सोमवार को पसीना बहाना पड़ा। भीड़
ज्यादा होने पर पुलिस कर्मियों को लगाया गया। शिक्षामित्रों की भीड़ देख
अस्पताल कर्मियों और वहां पर सक्रिय बाहरी लोगों ने जमकर फायदा उठाया।
ज्ञात
हो कि जिले के 1524 शिक्षामित्रों को सहायक टीचर के पद पर समायोजित किया
गया है। जिनको विद्यालय में सहायक टीचर के पद पर ज्वाइन करना है। इसके लिए
शैक्षिक प्रमाण पत्रों के साथ स्वास्थ्य फिटनेस प्रमाण पत्र भी जरूरी है।
समायोजन पत्र मिलते ही सोमवार को जिला अस्पताल में शिक्षामित्रों की भारी
भीड़ पहुंच गई।
शुल्क जमा काउंटर पर लंबी लाइन लग गई। महिला और पुरुष
आवेदकों की ज्यादा भीड़ होने पर हंगामा होने लगा। इस पर अस्पताल प्रशासन ने
पुलिस कर्मियों को तैनात किया। पूरे दिन प्रमाण पत्र को लेकर शिक्षामित्र
पसीना बहाते रहे। अस्पताल में देर शाम तक शिक्षा मित्रों की भारी भीड़ जमा
रही।
उधर, अस्पताल में भीड़ देखकर शिक्षा मित्रों की धड़कनें बढ़ गई।
भीड़ से शिक्षामित्र पसीने पसीने हो रहे थे। ऐसे में अस्पताल में सक्रिय
बाहरी लोग शिक्षामित्रों से मिल कर जल्द प्रमाण पत्र बनवाने को सांठ गांठ में जुटे हुए थे। इसमें फीस जमा करने के अलावा चिकित्सक से रिपोर्ट
लगवाने से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने का समझौता शामिल था।
उधर, अस्पताल
में डॉक्टर की रिपोर्ट लगवाना आसान नहीं है। यहां पर कई विभाग तो परीक्षण
कर सरलता से रिपोर्ट लगा देते हैं, पर कई महत्वपूर्ण विभाग हैं, जहां पर
सही को गलत और गलत को सही कर दिया जाता है। इससे आवेदकाें को काफी मशक्कत
करनी पड़ रही है।
ज्ञात हो कि फिटनेस प्रमाण पत्र बनवाने को आवेदक को एक
रुपये का पर्चा बनवाना पड़ता है। उसके बाद एक फोटो लगाकर पचास रुपये
निर्धारित शुल्क जमा किया जाता है। शुल्क जमा होने के बाद चार डॉक्टरों की
परीक्षण रिपोर्ट लगती है। उसी पर सीएमएस की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया
जाता है।
उधर, सीएमएस डा. आर के मिश्र ने बताया कि भीड़ ज्यादा होने के
कारण प्रमाण पत्र जारी होने में समय लग रहा है। डॉक्टरों को परीक्षण कर
रिपोर्ट लगाने के निर्देश दिए गए हैं। आवेदक इंतजार कर लें, अगर समस्या है
तो संपर्क कर सकते हैं।