हरदोई। टड़ियावां थाना क्षेत्र के ग्राम सोहासा में हैचरी संचालित करने वाले हनीफ अली ने पंगेशियस मछली की ब्रीडिंग में सफलता हासिल की है। उत्तर भारत में पंगेशियस की ब्रीडिंग करने वाली ये पहली हैचरी है। यहां मछली के आठ लाख बच्चे तैयार हैं। इस सफलता पर हनीफ के साथ ही मत्स्य विभाग व सहयोग करने वाली कंपनी के अधिकारी खासे उत्साहित हैं।
सोहासा निवासी हनीफ अली ने 1990 मेें पिता कासिम अली के साथ मछली पालन शुरू किया था। पहले 5 एकड़ के तालाब तालाब का पट्टा कराकर मछली पालन करते रहे। 2006 में अपनी दस बीघा भूमि पर तालाब बनवाकर मछली की ब्रीडिंग शुरू की। अभी तक सामान्य मछलियों की ब्रीडिंग करते रहे हनीफ अली ने मार्च 2020 से पंगेशियस मछली की ब्रीडिंग शुरू की। पश्चिम बंगाल से ब्रूडर (अंडे वाली मछलियां) लाकर मत्स्य विभाग व मछली ब्रीडिंग कंपनी के तकनीकी सहायक की मदद से काम शुरू किया। तीन बार असफल होने के बाद मई में फिर से ब्रीडिंग की कवायद शुरू की। इस बार हेल्दी ब्रीड तैयार हुआ है। हनीफ अली ने बताया कि उनके पास आसपास के जनपदों व प्रदेशों से व्यापारी आने लगे हैं, लेकिन अभी वह बिक्री नहीं करेंगे। सर्दी में ब्रीड का रखरखाव करेंगे।
अभी तक तैयार होती थी ये ब्रीड
साबरी मत्स्य बीज समिति के माध्यम से हैचरी संचालित करने वाले हनीफ अली ने बताया कि हेचरी में अभी तक रोहू, नैन कतला, ग्रास कॉर्प, कॉमन कॉर्प व सिल्वर कॉर्प मछलियों की ब्रीडिंग करते रहे हैं।
पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश से मंगाते हैं ब्रीड
मत्स्य विभाग के निरीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि जिले में पिछले कुछ सालों से पंगेशियस मछली पालन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। जिले में 10 से 15 हेक्टेयर में पंगेशियस मछली का पालन हो रहा है। मछली पालक पंगेशियस ब्रीड पश्चिम बंगाल व बांग्लादेश से मंगाते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली व उत्तराखंड में पंगेशियस की ब्रीडिंग करने वाली पहली हेचरी बनने का गौरव जिले की हेचरी को हासिल हुआ है।
हैचरी संचालक हनीफ अली द्वारा किए गए इस अभिनव प्रयोग ने मछली ब्रीडिंग के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। हेचरी संचालक का नाम निदेशक कार्यालय के माध्यम से नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड को भेजा जा रहा है, जल्द ही उन्हें सम्मानित कराया जाएगा। - रेखा श्रीवास्तव, सहायक निदेशक, मतस्य विभाग
हनीफ अली के इस प्रयोग व प्रयास में पहले चरण से लेकर अब तक उन्हें आवश्यकतानुसार हर स्तर पर तकनीकी सहयोग दिया गया है। सही दिशा में प्रयास से हेचरी ने उपलब्धि हासिल की है। पंगेशियस की स्थानीय स्तर पर सफल ब्रीडिंग से मछली पालन के क्षेत्र में नई संभावनाएं जगी हैं। - रामानंद गुप्ता, मत्स्य तकनीकी विशेषज्ञ/सलाहकार