वित्तीय वर्ष 2012-13 व 2013-14 में शौचालय निर्माण के मामले में तत्कालीन प्रधान और ग्राम सचिवों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके खिलाफ सोमवार को ग्राम विकास अधिकारी-ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति ने धरना प्रदर्शन किया। ग्राम सचिवों ने दर्ज की गई एफआईआर को वापस लेने की मांग की। समन्वय समिति ने जिलाधिकारी से मिलकर विभागीय जांच कराने और अपना पक्ष रखने का मौका देने की बात कही। साथ ही जिला विकास अधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है।
डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम और निर्मल भारत अभियान योजना से जनपद में वित्तीय वर्षों के दौरान बनाए गए शौचालय में धनराशि का गबन हुआ। प्रमुख सचिव पंचायत राज विभाग के निर्देश पर जनपद के 33 ग्राम प्रधान और 24 ग्राम सचिवाें पर एफआईआर कराई गई, जिनमें से करीब आठ सचिवों को निलंबित भी किया जा रहा है। जिसके खिलाफ सोमवार को ग्राम विकास अधिकारी-ग्राम पंचायत अधिकारी समन्वय समिति ने विकास भवन परिसर में धरना प्रदर्शन किया। ग्राम पंचायत अधिकारी संघ प्रांतीय अध्यक्ष रजनीकांत त्रिवेदी ने कहा कि मनरेगा का भुगतान मनमानी के कारण नहीं हो पाया।
शौचालय की अहारित धनराशि की सामग्री क्रय की गई है और धन का गबन नहीं किया गया। ग्राम विकास अधिकारी संघ जिलाध्यक्ष अशोक मिश्रा ने कहा कि कर्मचारियों से बिना कोई स्पष्टीकरण लिए निलंबन की कार्रवाई कर दी गई, जिससे उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी नहीं मिला। समन्वय समिति के ज्ञानेंद्र ने बताया कि साथी कर्मचारियों पर एफआईआर की कार्रवाई स्थगित की जाए और विभागीय जांच के बाद ही निर्णय लिया जाए। समन्वय समिति ने जिलाधिकारी रमेश मिश्र से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया और अपना पक्ष रखा। कर्मचारियों ने जिला विकास अधिकारी उग्रसेन यादव से भी मिलकर उन्हें ज्ञापन सौंपा है। इस दौरान काफी संख्या में ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी मौजूद रहे।