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Hardoi News: प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सक, उनकी बहन और स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज

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हरदोई। देर से छुट्टी करने और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राइवेट अस्पताल के चिकित्सक, उनकी बहन और स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पीड़ित महिला ने मुताबिक, 17 जनवरी को उन्होंने एंबुलेंस में मृत बच्चे को जन्म दिया था। अगर उनकी छुट्टी समय पर हो जाती तो उनका बच्चा जीवित होता।
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धियर महोलिया निवासी ममता ने 16 दिसंबर को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उनके पति सोनपाल सेवानिवृत्त सैनिक हैं। वह 14 सप्ताह की गर्भवती थीं। छह जनवरी 2025 को लखनऊ के आर्मी अस्पताल में दवा लेने गईं थीं। वहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। 15 जनवरी को उनकी छुट्टी हो गई थी। 16 जनवरी की रात आठ बजे उनकी तबीयत बिगड़ गई। सोनपाल उन्हें पास से बाइपास रोड स्थित विकास नगर के सिद्धि विनायक अस्पताल ले गए। वहां डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने उनका उपचार किया। डॉ आशीष की बहन जया श्रीवास्तव ने उन्हें ग्लूकोज की बोतल में डाल कर दो इंजेक्शन और कमर में दो इंजेक्शन लगाए, लेकिन उन्हें आराम नहीं मिला।
सोनपाल ने पत्नी की छुट्टी करने की बात कही, लेकिन डाॅ. आशीष और उनके स्टाफ ने हीलाहवाली की। तबीयत बिगड़ने व खुशामद करने के बाद 17 जनवरी की रात 10:45 बजे ममता को छुट्टी दी गई। सोनपाल के बिल मांगने पर उन्हें 1995 रुपये की पर्ची दी गई। उन्होंने 1850 रुपये ऑनलाइन और 145 रुपये नकद दिए। डिस्चार्ज कार्ड के नाम पर पर्ची दी गई। इसके बाद ममता को महिला चिकित्सालय ले जाया गया। यहां से उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया गया।
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लखनऊ ले जाते समय ममता ने एंबुलेंस में मृत बच्चे (पुत्र) को जन्म दिया। केजीएमयू लखनऊ में 18 जनवरी की सुबह 3:56 बजे भर्ती किया गया। 20 जनवरी को तबीयत सही होने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई। ममता के मुताबिक, केजीएमयू की डॉ. अमिता पांडेय ने बताया था कि हरदोई के प्राइवेट अस्पताल में सही इलाज न करने और देर से छुुट्टी करने पर नवजात की मौत हुई है। पीड़ित महिला ने चिकित्सक, उनकी बहन और स्टाफ पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। देहात कोतवाल हरिनाथ ने बताया मामला संज्ञान में है। जांच की जा रही है।
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