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खाद की किल्लत: 15 सौ रुपए की बोरी खरीदने को मजबूर किसान

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फोटो-16- बंद पड़ा पीसीएफ गोदाम। संवाद - फोटो : HARDOI
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बिलग्राम। डीएपी खाद की जबरदस्त किल्लत किसानों के लिए परेशानी का सबब बनी है। कस्बा स्थित पीसीएफ गोदाम पर दस दिन से खाद का वितरण नहीं किया गया है। मजबूरी में किसानों को बाजार से खाद महंगी दर पर खरीदनी पड़ रही है। किसानों को 1190 रुपये की डीएपी खाद की एक बोरी के 1500 रुपये देने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि जरूरत के वक्त गोदाम से वितरण बंद है। दुकानों से खाद खरीदने पर उन्हें अतिरिक्त रुपये देने पड़ रहे हैं। जिससे फसल पर लागत बढ़ना तय है।
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बिलग्राम क्षेत्र में आलू, मटर और गेहूं आदि की बुआई का काम शुरू हो गया है। गोभी की फसल खेतों में खड़ी है। इन सभी फसलों के लिए किसानों को इस समय डीएपी की जबरदस्त दरकार है। किसान डीएपी लेने के लिए कस्बा स्थित पीसीएफ गोदाम की दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें समय पर खाद नहीं मिल पा रही है। गोदाम से खाद न मिल
पाने के कारण किसानों को मजबूर दुकानों से प्राइवेट कंपनी की खाद खरीदनी पड़ रही है। इसके लिए किसानों को अतिरिक्त रुपये भी चुकाने पड़ रहे हैं। किसान महिपाल, मुबीन, कमलाकांत व रुकमंगल आदि ने बताया कि इस समय बुवाई के लिए फसलों के लिए डीएपी की जरूरत है, लेकिन गोदाम पर डीएपी का वितरण नहीं हो रहा है।
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बताया कि वह निरंतर चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कर्मचारी वितरण को लेकर सही जवाब नहीं दे रहे हैं। जानकारी करने पर पता चला कि यहां 6 अक्तूबर को खाद का वितरण हुआ था, इसके बाद से वितरण बंद है। बताया कि
गोदाम पर खाद न मिलने पर किसानों को मजबूरन प्राइवेट दुकानों से खाद खरीदने पड़ रही है। इसके लिए उन्हें गोदाम पर मिलने पर 1190 रुपये में मिलने वाली खाद की जगह उन्हें दुकानों से 15 सौ रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खाद खरीदनी पड़ रही है। इससे उन पर अतिरिक्त खर्चे का बोझ पड़ रहा है। साथ ही फसलों की लागत मेें भी इजाफा हो रहा है।
गोदाम से खाद का वितरण न किए जाने की बात संज्ञान में आई है। खाद का वितरण न होने की वजह की जानकारी की जा रही है। प्रयास किया जाएगा कि किसानों को पर्याप्त मात्र में खाद उपलब्ध हो। दीपक वर्मा, एसडीएम, बिलग्राम
रहुला गांव निवासी मुबीन अहमद ने बताया कि वह आलू की फसल करना चाहते हैं। खेत में आलू बीज के साथ ही डीएपी खाद डालनी है। कई चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन गोदाम से खाद नहीं मिल पाई है।
हैबतपुर गांव निवासी रुकमंगल ने बताया कि आलू, गेहूं आदि की बुवाई का समय है। खाद के लिए रोज तहसील मुख्यालय जा रहे हैं, लेकिन डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है। समय पर बुवाई नहीं हो पा रही है।
हैबतपुर गांव निवासी कमला कांत ने बताया कि बुवाई के लिए यह उपयुक्त समय है। डीएपी की दरकार है, लेकिन गोदाम पर उपलब्ध नहीं है। प्राइवेट दुकानों से खाद महंगी पड़ रही है।
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