मेडिकल कॉलेज में जानकारी लेते इमरजेंसी एवं सर्विसेज के स्टेट नोडल अधिकारी प्रोफेसर डाॅ. एलडी मि
हरदोई। मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को नोडल अधिकारी ने इमरजेंसी और आईसीयू की व्यवस्थाओं को परखा। इमरजेंसी वार्ड में गंभीर मरीज के लिए जरूरी उपकरणों को जांचा। ज्यादातर उपकरण ग्रीन वार्ड और ओटी की अलमारी में रखे मिले। इस पर नोडल अधिकारी ने सभी उपकरणों को इमरजेंसी कक्ष में रखने के निर्देश दिए।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत इमरजेंसी एवं सर्विसेज के स्टेट नोडल अधिकारी प्रोफेसर डाॅ. एलडी मिश्रा बुधवार की दोपहर मेडिकल कॉलेज आए। यहां उन्होंने प्राचार्य जेबी गोगोई के साथ इमरजेंसी और आईसीयू की व्यवस्थाओं को देखा। इमरजेंसी वार्ड के प्रभारी डॉ. अमित आनंद व मौजूद नर्सिंग स्टाफ से उपलब्ध उपकरणों को दिखाने को कहा।
इस पर सामान्य उपकरण वहीं आसपास रखे मिले। नोडल अधिकारी ने इमरजेंसी-ट्रे में उपलब्ध सामान को जांचा। जिससे वह संतुष्ट दिखे। जब उन्होंने अंबु बैग और लैरिंगोस्कोप, सेंट्रल लाइन आदि उपकरण मांगे तो स्टाफ इधर-उधर तलाशने लगा। इसपर मौजूद चिकित्सक ने ग्रीन वार्ड नर्सिंग कार्यालय व ओटी की अलमारी से लाने के लिए कहा।
फिर वार्डबॉय कुछ देर बाद अलमारी से ये उपकरण लेकर आया पाया। नोडल अधिकारी ने इन उपकरणों को इमरजेंसी वार्ड में ही रखने के निर्देश दिए। नोडल अधिकारी आईसीयू वार्ड में भी गए।
यहां प्राचार्य ने बताया कि 32 वेंटिलेटरों को ऑपरेट करने के लिए टेक्नीशियन नहीं हैं। व्यवस्थाओं की जांच करके नोडल अधिकारी रिपोर्ट उच्काधिकारियों को सौंपेंगे। इस मौके पर सीएमएस डॉॅ. चंद्र कुमार, ईएमओ डॉ शेर सिंह, डॉ. बीएमएस पोखरिया आदि रहे।
इसमें प्रयोग करते हैं अंबु बैग, लैरिंगोस्कोप सेंट्रल लाइन
जिस व्यक्ति को सांस लेने में बहुत ज्यादा दिक्कत होती है। उसको मास्क रूपी अंबु बैग की सहायता से कृत्रिम सांस दिलाई जाती है। लैरिंगोस्कोप एक टॉर्च की तरह होता है। इसका उपयोग गले की जांच करने के लिए किया जाता है। सेंट्रल लाइन एक पतली लचीली ट्यूब होती है। उसका उपयोग कमर, छाती व गर्दन के अंदर डालकर दवाएं व तरल पदार्थ पहुंचाने में होता है।