जिले में बिजली बिल जमा करने की आनलाइन प्रक्रिया में
साइबर क्राइम का मामला प्रकाश में आया है। अधिशासी अभियंता की आईडी
पासवर्ड को हैक कर कुछ लोगों द्वारा चार उपभोक्ताओं के बिजली बिल जमा कर
दिए गए। देर रात जमा हुए बिलों की जानकारी जब अभियंता को मिली तो वह भी
सकते में आ गए और आईडी का पासवर्ड बदला और जानकारी शुरू कर दी।
इसके बाद
मामले में संलिप्त दो संदिग्ध संविदा कर्मियों के विरुद्ध कोतवाली में
एफआईआर दर्ज करवाई है। विभाग में आनलाइन प्रक्रिया द्वारा ही अब बिजली का
बिल जमा होता है। बिल जमा करने की जिम्मेदारी वैसे तो कार्यदायी संस्था की
है, पर विभाग के अफसर भी बिजली बिल में संशोधन कर सकते हैं और बिल जमा कर
सकते हैं। जिसके लिए संस्था ने सभी अफसरों की अलग आईडी बनाकर पासवर्ड दिया
है।
बिल जमा करने की आन लाइन प्रक्रिया में ही जिले में कुछ लोगों ने सेंध
लगा दी। जिले के अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड द्वितीय की आईडी और
पासवर्ड को चुरा कर दो कर्मियों ने फर्जी बिलिंग कर डाली। हालांकि, उक्त
संविदा कर्मिों द्वारा बड़ी घपलेबाजी की जाती इसके पहले मामला पकड़ में आ
गया।
ज्ञात हो कि बीती 25 फरवरी की रात 8:35 बजे सिटी पावर हाउस के
कंप्यूटर से 67,850 रुपये बिजली बिल हेड में जमा किए गए। इसमें त्रिवेदी
मार्केट संडीला के सुब्बाबाग निवासी चंद्र प्रकाश के 22,880 रुपये, संडीला
के मलकाना निवासी मंगूलाल पुत्र जवाहर लाल के 18,360 रुपये, शहर के सरायथोक
निवासी नूर मोहम्मद पुत्र अब्दुल अजीज के 7,850 और बाबा मंदिर तिराहा
निवासी विमलेश श्रीवास्तव के 18,780 रुपये जमा किए गए।
दूसरे दिन सुबह जब
अधिशासी अभियंता ने आईडी खोली तो उसमें रात 8:35 बजे 67,850 रुपये जमा देखा
तो वह भी सकते में आ गए। उन्होंने विभाग के अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की
और संबंधित उपभोक्ताओं को भी बुलवाकर जानकारी ली। इस पर उपभोक्ताओं ने
संविदा पर कार्यरत दो कर्मियों के नाम बताए।
अफसरों ने इसमें संडीला के
बिलिंग संस्था मां विंध्यवासिनी का मीटर रीडर रिंकू सिंह तथा सूरज कश्यप का
नाम लिया। अभियंता ने उक्त दोनों को दोषी मानते हुए 28 फरवरी को कोतवाली
शहर में रिपोर्ट दर्ज कराई है। एक्सईएन आरवी कटियार ने बताया कि इस मामले
में उक्त दोनों से रिकवरी करवाकर धोखाधड़ी की कार्रवाई की जाएगी।