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शहर के फुटपाथ पर दुकानदारां का कब्जा

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सिनेमा रोड पर कुछ यू फुटपाथ पर लगी स्वेटरों की दुकान। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : HARDOI
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हरदोई। अतिक्रमण शहर के लिए नासूर बनता जा रहा है। हाल ये है कि फुटपाथ पर दुकानें सजने से लोगों के लिए चलने तक को जगह नहीं बची है। चौराहों और प्रमुख मार्गों पर रोजाना जाम लगता है। ये सब देखते हुए भी नगर पालिका मौन है। इसको लेकर लोगों ने नाराजगी जताई है।
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शहर की प्रमुख बाजारों में मुख्य मार्ग तक पटरी दुकानें लगी रहती हैं। अतिक्रमण की वजह रोड किनारे खड़े आड़े-तिरछे वाहन भी हैं। लेकिन सबसे बड़ी वजह पटरी दुकानदार हैं। जाम के फेर में शहरवासी फंसते नजर आते हैं। शहरवासियों की मांग पर नगर पालिका कभी पीली पट्टी खींचकर अतिक्रमणकारियों को चेतावनी देती है तो कभी अभियान चलाकर अतिक्रमण साफ करने का दावा करती है। लेकिन पालिका वास्तव में करती कुछ नहीं है। यही कारण है कि शहर की सबसे बड़ी समस्या जाम व अतिक्रमण बनी हुई है। बुधवार को भी शहर के सोल्जर बोर्ड चौराहे, सिनेमा चौराहे, बड़े चौराहे, स्टेशन रोड व सिनेमा रोड पर कई बार जाम लगा। उसमें लोग जूझते दिखे। इस संबंध में नगर पालिका के ईओ रवि शंकर शुक्ल का कहना है कि आला अधिकारियों के संज्ञान में शिकायत लाकर उचित कदम उठाया जाएगा।
हरदोई। सिनेमा रोड पर बस बिल्डिंग के सामने जहां दिन में कई कई बार जाम लगता है, यहां बुधवार को दिन में दो बजे स्वेटर की दुकान पूरे फुटपाथ पर सजी नजर आईं। पीछे की दुकानों पर जाने वाले वाहन सवारों को मजबूरन दोपहिया व चौपहिया वाहन रोड पर खड़े करने पड़ते हैं। इसलिए जाम की स्थिति उत्पन्न होती है। अब नगर पालिका क्यों शांत है, इसका जवाब कोई नहीं देता।
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हरदोई। रेलवेगंज में स्टेशन रोड पर पुलिस चौकी से चंद कदम आगे अतिक्रमण का हाल कुछ यूं दिखाई दिया कि वाहन सवार जाम में फंसकर परेशान रहे। फुटपाथ से लेकर रोड तक पन्नियां व तिरपाल बेचे जा रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि यहां भी नगर पालिका की नजर नहीं जा पा रही है। लोग जाम में फंसकर लगातार पालिका को कोसते दिखे।
शहर के बबलू का कहना है कि सारे नियम क्या शहरवालों पर ही लागू होते हैं। वाहन लेकर शहर में बिना हेलमेट निकलो तो नियमों का उल्लंघन लेकिन शहर में रोड खराब हो या फिर जाम लगा हो तो गलती किसी की नहीं। उल्टे इधर उधर वाहनों के बीच फंसकर लोग जान आफत में डालें।
शहर के दुर्गेश का कहना है कि पटरी दुकानदारों को पालिका को कहीं और स्थान देना चाहिए। इनके कारण दुकानदारों की बिक्री नहीं हो पाती। दुकानों के बाहर जगह न होने से लोग भी अपने वाहनों को नहीं ला पाते। जिससे बिक्री हल्की रहती है।
अंशू सिंह का कहना है कि दुकानदार खुद अपनी दुकान तो संचालित करते ही हैं। अधिकांश लोग फड़ों को भी किराये पर उठाते हैं। जिसमें पालिका व दुकानदार दोनों किराया लेते हैं। अतिक्रमण साफ न होने की यही वजह है। दुकानदार यदि चाह लेगा तो दुकान के बाहर फड़ क्यों लगाएगा।
शहर के नीतेश शर्मा का कहना है कि दिन प्रतिदिन कोई रोक टोक न हो पाने के कारण शहर का अतिक्रमण बेतरतीब सा हो गया है। सुबह हो या शाम, चौराहों पर जाम लगता है। स्कूली बसें फंसने से बच्चों को भी काफी समस्याएं होतीं हैं लेकिन पालिका है कुछ सुनती ही नहीं।
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