फोटो-15-अपनी पत्नी आरती के साथ किसी साधन का इंतजार करते पचकोहरा निवासी लवकुश। संवाद
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अपने जिले की माटी छोड़कर रोजी रोटी की तलाश में अमृतसर तक गए। वहां ब्रेड कंपनी में काम करके परिवार का भरण पोषण किया लेकिन कोरोना ने उनकी ही नहीं बल्कि उनके जैसे सैकड़ों साथियों को भुखमरी की कगार पर ला दिया। ऐसे में बेसहारे घर की ओर चल पड़े।
जिले के ग्राम पचकोहरा निवासी लवकुश अपनी पत्नी आरती देवी के साथ 11 मई को अमृतसर से निकले थे। कभी साधन मिला तो कभी पैदल चले। सात दिन बाद सोमवार को जनपद की सीमा तक पहुंचे तो राहत की सांस ली।
लवकुश ने बताया कि वह ब्रेड कंपनी में मेहनत से कमा रहे थे। घर भी कुछ पैसा भेज पाते थे। उनके साथ अन्य सभी मजदूर भी इस तरह कार्य कर रहे थे लेकिन कोरोना के कारण लॉकडाउन का तूफान ऐसा आया कि सब चौपट कर दिया। पैसा तो चला ही गया, रोटी के भी लाले हो गए।
इसके चलते उन्हें घर लौटना पड़ा। उन्होंने बताया कि अब जो कुछ करना है गांव में ही करना है।