जिले में ई-डिस्ट्रिक योजना आधी अधूरी तैयारियों के
साथ लागू किए जाने का खामियाजा आम लोगों को उठाना पड़ रहा है। आलम यह है कि
योजना लागू होने से ठीक पहले तहसीलों में एकल खिड़की बंद कर दी गई और फिर
योजना लागू होते ही मैनुअल वर्किंग बंद हो गई, लिहाजा तहसीलों में आय,
जाति, निवास प्रमाण पत्रों को पाने के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है।
अफसरों
की बेपरवाही और योजना को लेकर बरती गई उदासीनता ने सिर मुंडाते ही ओले
पड़ने की कहावत चरितार्थ कर दी है। उधर, डीएम रमेश मिश्रा का कहना है कि
शासन के आदेश पर तहसीलों में एकल खिड़की बंद कर आनलाइन प्रमाण पत्रों की
व्यवस्था के तहत ई-डिस्ट्रिक योजना लागू हुई है और जो दिक्कतें हैं, उन्हें
दूर कर लिया जाएगा।
उधर, नए लोकवाणी केंद्रों के माध्यम से आय, जाति,
निवास प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन करने की व्यवस्था है, ऐेसे में तहसीलों
के आस पास इनकी स्थापना कर जनता को राहत दी जा सकती है, मगर इसमें में खेल
हो रहा है। अगस्त 14 से कई आवेदन पड़े हैं, पर पटल प्रभारी कहते हैं कि इन
पर रोक लगी है।
इस बाबत जिला प्रशासन ने जिन सर्विस प्रोवाइडर के
केंद्रों के लिए टेंडर होने को लेकर लोकवाणी केंद्र में रोक रखे हैं। उनका
टेंडर का भी इंतजार खत्म नहीं हो रहा है और ऐसे में सर्विस प्रोवाइडर के
माध्यम से भी सर्विस सेंटर नहीं खुल पा रहे है।
इतना ही नहीं आय, जाति,
निवास आदि प्रमाण पत्रों के लिए लागू की गई नई व्यवस्था की खामियों एवं
लोकवाणी आदि को लेकर प्रशासन के निर्णय से जनता कराह रही है। लोगों का कहना
है कि जिस प्रशासन के ऊपर जनता का दु:ख दर्द दूर करने का जिम्मा है, जब
वहां ही उदासीनता से दर्द मिला है, तो इस दर्द को दूर करने की दवा कौन
देगा।