हरदोई। जिले के टीबी रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। जिला क्षय रोग केंद्र का संचालन अब मेडिकल कॉलेज परिसर में हो सकेगा। इससे टीबी रोगियों को भटकना नहीं पड़ेगा। कर्मचारियों में भी स्थान को लेकर चल रही असमंजस की स्थिति दूर हो गई। मेडिकल कॉलेज ने जिला क्षय रोग केंद्र को स्थान देने के साथ प्रबंधन भी अपने पास रख लिया है।
जिले में 11,617 के करीब टीबी मरीज हैं। इन मरीजों का जिला क्षय केंद्र से इलाज किया जाता है। जिला क्षय केंद्र से ही मरीजों को पोषण किट और दवाएं दी जाती हैं। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में संचालित हो रहे जिला क्षय केंद्र को हटाने की कवायद लगातार चल रही है। प्राचार्य इसके समकक्ष प्लोमनरी विभाग का हवाला देकर टीबी क्लीनिक को हटाने के निर्देश दे दिए। उधर, क्षय केंद्र को न तो ट्रॉमा सेंटर में जगह मिल रही थी और न ही 100 शैया संयुक्त चिकित्सालय में। इससे अब मरीजों के इलाज पर संकट मंडरा रहा था, वहीं कर्मचारियों में भी स्थान को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
इसको लेकर मंगलवार को सीएमओ और प्राचार्य के बीच बैठक हुई। इसमें जिला क्षय केंद्र का संचालन मेडिकल कॉलेज परिसर में ही करने पर सहमति बन गई है। हालांकि मेडिकल कॉलेज ने जिला क्षय केंद्र का प्रबंधन अपने पास रखा है। इस पर सीएमओ ने भी सहमति जता दी है। हालांकि कर्मचारियों इस फैसले से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
नियम मेडिकल कॉलेज के योजनाएं विभाग की
सीएमओ और प्राचार्य के बीच बनी सहमति के बाद कर्मचारी असमंजस में हैं। जिला क्षय केंद्र का संचालन मेडिकल कॉलेज परिसर में होगा और प्रबंधन भी महाविद्यालय के प्राचार्य के पास रहेगा। ऐसे में नियम तो मेडिकल कॉलेज के चलेंगे लेकिन योजनाएं स्वास्थ्य विभाग की संचालित होंगी। इसको लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। क्योंकि प्राचार्य ने जिला क्षय केंद्र पर मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक से ओपीडी भी कराने के निर्देश दिए हैं। जिला क्षय केंद्र पर भी चिकित्सक मौजूद हैं। इसके लिए तीन कक्ष मांगे गए हैं। ऐसे में एक तो मरीज बढ़ेंगे, वहीं योजनाओं के संचालन में समस्या भी आएगी।
मेडिकल कॉलेज आने से पहले जिला क्षय केंद्र यहीं पर संचालित हो रहा है, ऐसे अब अगर कहीं स्थान नहीं मिल रहा है तो जगह देना ही पड़ेगी। जिला क्षय केंद्र संचालित होगा और चिकित्सक ओपीडी भी करेंगे। -डॉ. जेबी गोगोई, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज