प्रदेश में एक बार फिर गोलमाल कर छात्रवृत्ति हड़पे जाने का मामला सामने आया है। इस बार शासन ने जिले के 31237 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं और संबंधित 110 इंटर कालेज, 94 हाईस्कूल स्तर एवं 112 डिग्री कालेजों को ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए हैं।
बकौल समाज कल्याण विभाग जिले के सत्र 2015-16 में छात्रवृत्ति के लिए कक्षा 9-10, इंटर, आईटीआई, डिग्री कालेजों के छात्र छात्राओं के आवेदन मांगे गए थे। जिनका डाटा फीड कराकर राज्य सूचना विज्ञान केंद्र लखनऊ को भेजा गया था। जहां पर संदेह के आधार पर जिले के लगभग 32 हजार आवेदनों में डाटा व जानकारी पूरी न होने के कारण संबंधित संस्थानों से आठ जनवरी तक सारी कमियों को पूरा करने के लिए निर्देशित किया गया था। समय बीतने के बाद भी इन कमियों को पूरा नहीं किया जा सका।
शासन ने इस पूरे मसले को बड़ी गंभीरता से लिया है। समाज कल्याण अधिकारी एसएस श्रीवास्तव ने बताया कि जिले के कक्षा नौ से 10 तक के 6671, इंटर के 4888 एवं डिग्री कालेजों के 21 हजार 665 आवेदनों पर संदेह व्यक्त किया गया था और जानकारी मांगी गई थी जिस पर कुछ डाटा और कालेजों ने दे दिया। शेष 31 हजार 237 छात्रवृत्ति के आवेदन निरस्त कर दिए गए। उन्होंने बताया कि संबंधित जिले के 110 इंटर कालेज, 94 हाईस्कूल एंव 112 डिग्री कालेजों को भविष्य में भी छात्रवृत्ति के मामले में ब्लैक लिस्टेड करने के निर्देश जिलाधिकारी को दिए गए हैं।
गठित समिति करेगी इस मसले पर जांच
समाज कल्याण अधिकारी एसएस श्रीवास्तव ने बताया कि छात्रवृत्ति के मामले मेें जहां भी संदेह आ जाता है वहां पर प्रमुख सचिव के निर्देश हैं कि वहां पर गठित कमेटी इस मसले पर तत्काल जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट प्रमुख सचिव को देगी। जिस पर जिले में भी डीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित होगी। जिसमें सीडीओ, डीआईओएस, एनआईसी अधिकारी, कोषाधिकारी, व समाज कल्याण अधिकारी शामिल होंगे और जांच करेंगे।
इससे पूर्व भी छात्रवृत्ति में हो चुका फर्जीवाड़ा
यह पहली बार नहीं है कि जब छात्रवृत्ति के नाम पर फर्जीवाड़ा होने की आशंका पर आवेदन निरस्त किए गए हो। बताया गया कि कुछ वर्ष पूर्व कक्षा आठ तक की छात्रवृत्ति में पंजीकृत छात्र छात्राआें की संख्या से अधिक छात्रवृत्ति की मांग की गई थी। गोलमाल की शिकायत पर जांच हुई और उसकी पुष्टि होने पर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यों पर रिकवरी तक की कार्रवाई हुई थी।
जानकारी मिलते ही सकते में आ गए जिम्मेदार
आवेदनों के निरस्तीकरण के बाद और जांच की प्रक्रिया सामने आने की खबर लगते ही संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य, प्राचार्य सकते में हैं और आगे की प्रक्रिया को लेकर अभी से फोन घनघनाने लगे हैं। डीआईओएस कार्यालय में अभी तक निरस्त आवेदनों का डाटा भले न पहुंचा हो लेकिन हुई कार्रवाई व समिति को लेकर सूचनाएं जरूर आ गई हैं।