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झाड़ी बाबा के उर्स में अकीदतमंदों का लगा तांता

Wed, 18 Nov 2015 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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संडीला स्थित झाड़ी शाह बाबा की दरगाह पर अकीदतमंदों का तांता लगा है। दूरदराज से आए अकीदतमंद बाबा की मजार पर माथा टेक मन्नत मांग रहे हैं। यहां गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल देखने को मिल रही है। देश में अमन चैन की दुआ मांगी जा रही है।
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झाड़ी शाह बाबा की दरगाह पर लगने वाला 24वां सालाना उर्स जोरों पर है। दरगाह क्षेत्र पूरी तरह से रोशनी में जगमगा रहा है। गेट से लेकर दरगाह तक जबरदस्त रोशनी का इंतजाम किया गया है। सुबह से देर रात तक चादर चढाने और जियारत करने वालों का तांता लगा रहता है।

दरगाह के सरपरस्त सूफी इदरीश शाह मंसूरिया व सज्जादानशीन सूफी शहनवाज आलम समेत दरगाह कमेटी के सदस्यों की देखरेख में 13 नवंबर से शुरू हुआ उर्स सद्भाव एवं भाईचारे का प्रतीक है। यहां हिंदुओं की संख्या भी काफी रहती है। हिंदू झाड़ी शाह बाबा की मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं।
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मेले में खरीददारी करते हैं। उर्स 21 नवंबर को जवाबी आतिशबाजी के साथ समाप्त होगा। रविवार की शाम को उर्स के सरपरस्त सूफी इदरीश शाह मंसूरिया एवं कमेटी के अन्य लोगों की तरफ से झाडी शाह बाबा की मजार पर सरकारी चादर पेश करने के बाद अमन-चैन की दुआ मांगी गई।

मुंबई के कव्वालों के बीच मुकाबला 20 को
झाड़ी शाह बाबा की दरगाह परिसर में 20 नवंबर को मुंबई के कव्वालों के बीच जवाबी मुकाबला होगा। कई वर्षों से उर्स के दौरान मोहर्रम पड़ जाने से जवाबी कव्वाली नहीं हो पा रही थी। इस बार जवाबी कव्वाली सुनने वालों की संख्या काफी अधिक होने की संभावना है।

यह उर्स 24 वर्षों में काफी बड़ा हो चुका है। उर्स में लगने वाला मेला कदीर पहलवान की देखरेख में चल रहा है। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय पुलिस के अलावा पीएसी भी तैनात की गई है। स्थानीय अधिकारी भी समय-समय पर शांति व्यवस्था का जायजा ले रहे हैं।

आल इंडिया मुशायरा
दरगाह के सामने सोमवार की रात आल इंडिया मुशायरे का आयोजन हुआ। शुभारंभ पूर्व मंत्री अब्दुल मन्नान ने किया। संचालन गुलजार जिगर देवबंदी ने किया। मुशायरे में महिला शायरों ने भी कलाम पेश किए। शुरुआत रूकसार बलरामपुरी ने कुछ इस तरह से की-इस तरफ यार आना ठीक नहीं, मेरी नींद उड़ाना ठीक नहीं, मुझसे कहता है पास आ जाओ, दूर से मुस्कुराना ठीक नहीं।

उन्होंने दूसरा कलाम कुछ यूं पेश किया कि मोहब्बत मै भी करती हूं, मोहब्बत तुम भी करते हो, जमाने से है क्या करना, चलो इजहार हो जाए सुनाकर वाहवाही लूटी। इसके बाद शहजादा कलीम ने ने वही लहजा वही जज्बा वही ईमान पैदा कर, झुका दे सामने दुश्मन सर वो शान पैदाकर सुनाकर तालियां पाईं।

वसीम राजपुरी ने अपना कलाम कुछ यूं पेश किया कि आजकल जिस्म दिखाने का चलन है हर तरफ, पहले औरत को डर था कि कोई सर देख न ले...। इसके बाद जहाज देवबंदी, शरीफ शहबाज, नाजिया शहरी, सिराज मंजर, कासिम आदि ने कलाम पेशकर खूब वाहवाही लूटी।

मुशायरे से पूर्व जशभने मिलादुन्नबी व जलसा दस्तारबंदी एवं महफिल-ए-शमा का आयोजन भी किया गया। मुशायरे में इदरीश शाह मंसूरिया, सूफी मोहम्मद शाह आलम, व मेला इंचार्ज कदीर पहलवान, अमीन शाह व जकाउल हसन मौजूद रहे।

दंगल का हुआ आयोजन
उर्स के मौके पर सोमवार की दोपहर दंगल का आयोजन किया गया। संचालन उत्तर प्रदेश केसरी कदीर पहलवान ने किया। दंगल के पहले दिन सपा युवा नेता डा. अश्वनी सिंह ने पहलवानों का हाथ मिलवाकर शुभारंभ कराया। विजेता पहलवान नेपाल के पारस थापा को 11 हजार रुपये का नकद इनाम देकर सम्मानित किया। दंगल का समापन शाम को हुआ। मंगलवार को सुबह से आम लंगर का आयोजन हुआ। हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए।
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