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Hardoi News: फसलें भीगीं, धुल गए अरमान

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औरैया। चार दिन से हो रही बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खेतों में लगीं फसलें गीली हो गई हैं, जिससे उनकी कटाई का काम रुक गया है। जो किसान अपना अनाज मंडी तक ले आए थे, वह भी भीग गया है। अब उसे वापस ले जाया जा रहा है।
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अनाज ढुलाई का खर्च किसानों को मिलने वाले दाम को और भी घटा देगा। गेंहू की तैयारी को जुटे किसानों को धान की पैदावार की रकम नहीं मिल पा रही। जिसकी वजह से अगैती की बुवाई भी लेट हो रही है।
सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और बारिश शुरू हो गई। चार दिन से लगातार हो रही बारिश किसानों के लिए आफत बन गई है। खेतों में खड़ी फसलें गीली हो गई हैं। अब बारिश बंद होने के बाद ही फसल की कटाई हो सकेगी। कटाई के बाद ही किसान दूसरी फसल की बुआई कर पाएंगे। माना जा रहा है कि इसमें 15 से 20 दिन की देरी होगी। फसल गीली होने के कारण जो किसान सरकारी क्रय केंद्रों में बिक्री की सोच रहे थे, वे भी अब आढ़तियों का रुख करने को मजबूर होंगे।
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आढ़त पर गीली फसल भी ले ली जाती है, पर इसका दाम किसानों को काफी कम मिलता है। किसानों के मन में इस समय चिंता सिर्फ फसल बिक जाने की है, जिसका लाभ आढ़ती जरूर उठाएंगे। जो फसल कटकर मंडी पहुंच गई थी, उसे भी अब लौटाया जा रहा है। अनाज ढुलाई का यह खर्च किसानों के हिस्से ही आएगा। इससे उन्हें मिलने वाला दाम और कम होगा। किसान उम्मीद लगाए थे कि 15 नवंबर तक दूसरी फसल की बुआई कर देंगे, पर खेतों में फसल गीली होने के कारण बुआई में देरी होगी। गीली फसल ने अच्छे दाम मिलने के किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
औरैया मंडी से लौटा 40 हजार क्विंटल अनाज
धान की कटाई अभी लगभग 30 से 40 प्रतिशत ही हो पाई है। जिन किसानों ने कटाई पहले कर ली थी, वे उसे बिक्री के लिए औरैया गल्ला मंडी लेकर आए थे। मंडी में अनाज गीला होने के कारण अब उन्हें इसे सुखाने के लिए वापस ले जाने को कह दिया गया है। औरैया मंडी से अभी तक लगभग 40 हजार क्विंटल अनाज वापस लौटाया जा चुका है।
दाम भले कम मिले, अब यहां नहीं आएंगे
फफूंद के ग्राम कोठीपुर निवासी रामकुमार का कहना है कि भाड़े के ट्रैक्टर से फसल मंडी लेकर आए थे। दो पल्लेदार लगाए, उनको पैसा दिया। अब फिर अपने खर्च पर ढुलाई कराकर अनाज वापस ले जा रहे हैं। अब दोबारा यहां नहीं आएंगे। भले ही दाम कम मिले, आसपास किसी आढ़त में बेच देंगे।
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धान की फसल पानी में डूबी, किसान परेशान



सहार। क्षेत्र के दर्जनभर से ज्यादा गांवों धान की फसल पर संकट मंडरा रहा है। इन इलाकों में लगातार बारिश और खेतों में जलभराव से धान की फसल पानी में डूब गई है। कई स्थानों पर खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भीगकर खराब हो रही है।


किसानों का कहना है कि पिछले कई दिनों से बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है। इससे खेतों में जल निकासी का कोई रास्ता नहीं बचा है। ग्राम झाबर, पटना, बदरियापुर, पुर्वा भिम्मा, पुर्वा तरा, रामनगर, पुर्वा रावत, हीरामन, बंसाई, डिल्लाहार सहित आसपास के कई गांवों में किसानों ने मेहनत और लागत लगाकर फसल तैयार की थी। बारिश का पानी भरने से पौधे सड़ने लगे हैं।



किसानों ने बताया कि यदि जल्द ही पानी की निकासी नहीं की गई तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। किसान अब सरकार और प्रशासन से मदद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। उनका कहना है कि नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिया जाए।
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