हरदोई। एक ओर पुलिस महानिदेशक पुलिस की छवि सुधारने की कोशिश में लगे हैं, वहीं मातहत संवेदनहीन साबित हो रहे हैं। मारपीट की घटना में 18 नवंबर को मृत अधेड़ के शव का परिजनों ने कार्रवाई की मांग को लेकर अंतिम संस्कार नहीं किया। मृतक के ससुरालीजनों के पहुंचने पर चौथे दिन गुरुवार को शव का अंतिम संस्कार किया गया।
थाना क्षेत्र के ग्राम अतरौली निवासी राजेश (48) पुत्र चंद्रपाल सिंह और धर्मेंद्र पुत्र देवीबख्श सिंह का मकान पड़ोस में है। दोनों के बीच रास्ते को लेकर विवाद चल रहा है। शनिवार की देर शाम दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। रविवार की सुबह धर्मेंद्र ने परिजनों के साथ राजेश के घर पर हमला बोल दिया था। लाठी डंडा सरियों और लोहे की रॉड से घर में मौजूद राजेश, उनकी पत्नी निरुपमा, पुत्र मानवेंद्र और आशुतोष की पिटाई कर दी थी। चारों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां राजेश की मौत हो गई थी। निरुपमा और उसके पुत्र मानवेंद्र व आशुतोष को लखनऊ रेफर कर दिया गया था।
सोमवार को राजेश का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया था। पुलिस की कार्य प्रणाली से नाराज परिजनों ने शव अपने दरवाजे पर रख दिया था। यह पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाने की मांग पर अड़ गए थे। इस मामले को न तो प्रभारी निरीक्षक ने और न ही सीओ संडीला ने गंभीरता से लिया। चार दिन तक अतरौली में हालात तनावपूर्ण रहे। चौथे दिन गुरुवार को मृतक के ससुरालीजनों के समझाने पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। अतरौली के प्रभारी निरीक्षक ओपी तिवारी ने बताया कि इस प्रकरण में राजेश के सबसे छोटे पुत्र प्रेमी ने चार लोगों को नामजद करते हुए 20 अज्ञात लोगों के विरुद्ध तहरीर दी थी। इसी आधार पर बलवा और गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज है। धर्मेंद्र और उसके पुत्र विनय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
पुलिस से निराश परिजनों ने चौथे दिन किया शव का अंतिम संस्कार
अतरौली थाने के ग्राम अतरौली में पिटाई के दौरान हुई थी अधेड़ की मौत, दरवाजे पर शव रखकर विरोध जता रहे थे परिजन