हरदोई। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व विधायक वीरेंद्र वर्मा रविवार को भाजपा में शामिल हो गए। लखनऊ में भाजपा के प्रदेश कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई। उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों के भी भाजपा में शामिल होने का दावा किया गया है।
विधानसभा चुनाव करीब आते ही दलबदल की राजनीति ने रफ्तार पकड़ ली है। बीते दिनों जहां केंद्रीय उपभोक्ता भंडार के अध्यक्ष डॉ. अरुण मौर्य ने सपा की सदस्यता ले ली थी, वहीं रविवार को भी राजनीतिक परिवर्तन हुआ। वर्ष 2007 में तत्कालीन अहिरोरी विधानसभा सीट से बसपा विधायक चुने गए वीरेंद्र वर्मा रविवार को लखनऊ में भाजपा में शामिल हो गए।
वीरेंद्र वर्मा ने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव हरदोई लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में लड़ा था। मौजूदा समय में वह कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष थे। वीरेंद्र वर्मा वर्ष 2012 और 2017 में बसपा के टिकट पर सांडी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं।
पूर्व विधायक वीरेंद्र वर्मा के भाजपा में शामिल होते ही कई मौजूदा विधायकों के टिकट पर खतरा मंडराने लगा है। पिछले कुछ दिनों से आरक्षित सीटों के टिकट में उलटफेर की संभावना जताई जा रही थी। वीरेंद्र वर्मा के भाजपा में शामिल होने से इस संभावना को और अधिक मजबूती मिली है। जाहिर सी बात है कि वीरेंद्र वर्मा का टिकट का
दावा सबसे पहले सांडी विधानसभा क्षेत्र पर ही होगा। पिछले दो विधानसभा चुनाव वह इसी सीट से लड़े, लेकिन सफल नहीं हुए। ऐसे में कहीं न कहीं इस सीट से मौजूदा भाजपा विधायक के टिकट पर भी खतरा है। अगर क्षेत्र परिवर्तन की भी बात आई तो भी किसी न किसी मौजूदा विधायक (आरक्षित सीट से) पर इसका असर पड़ना तय है।