हरदोई। सदर तहसील में तैनात रहे अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर एक सहकारी समिति को तालाब का पट्टा 10 वर्ष के लिए कर दिया। तकरीबन चार साल तक जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी गड़बड़ी पर पर्दा डाले रहे, लेकिन ग्राम प्रधान ने गाेपनीय ढंग से शिकायत दर्ज करा दी। इसके बाद जांच हुई तो पूरा खेल सामने आ गया।
सदर तहसील क्षेत्र के सधई बेहटा गांव में 10 अलग-अलग गाटा संख्या में तालाब हैं। इनमें से दो गाटा संख्या के तालाबों का क्षेत्रफल लगभग 11 हेक्टेयर है। आठ तालाबों का कुल रकबा 4.9500 हेक्टेयर है। खास बात यह है कि तालाब अलग-अलग गाटा संख्या में हैं। इन तालाबों में मछली पालन और सिंघाड़े की फसल की जाती है। उक्त अलग-अलग गाटा संख्या में स्थित तालाबों काे एक-दूसरे से जुड़ा बताते हुए नीलामी सूचना 13 जुलाई 2020 को निकाली गई। 10 अगस्त को नीलामी हुई और दो सितंबर 2020 को मत्स्य जीवी सहकारी समिति लिमिटेड तेरवा दहिगवां विकास खंड बेहंदर को आवंटित कर दी गई।
इस मामले को लेकर सधई बेहटा की ग्राम प्रधान पार्वती ने डीएम एमपी सिंह से शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया कि नियमों के विपरीत और तथ्यों को छिपाकर सहकारी समिति को आवंटन किया गया है। डीएम ने एसडीएम सदर एसके मिश्रा से एडीएम के माध्यम से जांच कराई। जांच में नियमों के विपरीत मत्स्य जीवी सहकारी समिति को तालाब आवंटित किए जानने की पुष्टि हुई है। एसडीएम ने एडीएम काे रिपोर्ट भेजी है।
यह मिली गड़बड़ी
-राजस्व विभाग का स्पष्ट आदेश है कि तालाबों का आवंटन ग्राम पंचायत, विकास खंड या अधिकतम तहसील क्षेत्र के व्यक्ति को ही नीलाम या आवंटित किया जा सकता है। यह व्यक्ति मछुआरा या कुम्हार समाज से हो तो प्राथमिकता दी जाएगी। सधई बेहटा में तालाब का आवंटन ग्राम पंचायत, विकास खंड और तहसील क्षेत्र से बाहर की सहकारी समिति को कर दिया गया।
-मत्स्य जीवी सहकारी समिति को तालाबाें का आवंटन तभी किया जाता है, जब तालाब का क्षेत्रफल पांच एकड़ से बड़ा हो। सधई बेहटा में अलग-अलग क्षेत्रफल के तालाब थे। इन सभी का क्षेत्रफल पांच एकड़ से कम का ही था। ऐसे में यह व्यक्तिगत पात्र काे दिया जाना चाहिए था, लेकिन समिति को आवंटित कर दिया गया।
-चहेती समिति को तालाब आवंटित करने के लिए अलग-अलग गाटा संख्या में स्थित आठ तालाबों को एक दूसरे से मिला बताया गया। इससे इनका कुल रकबा 4.9500 हेक्टेयर हो गया। इसी को आधार बनाकर जिम्मेदारों ने खेल कर दिया।
करोड़ों की कमाई, इसलिए हुआ गोलमाल
नाम न छापने के अनुरोध पर जानकार बताते हैं कि मछली पालन और सिंघाड़े की फसल मुनाफे का काम है। जितने क्षेत्रफल के तालाबों का आवंटन समिति को किया गया है, उसमें लगभग एक करोड़ रुपये की बचत का खेल है। लगभग 60 लाख प्रतिवर्ष मछली पालन से और 50 लाख रुपये प्रतिवर्ष लगभग सिंघाड़े की फसल से पांच हेक्टेयर क्षेत्रफल के तालाबों से कमाए जा सकते हैं। मतलब यह कि चार साल में लगभग चार करोड़ रुपये के वारे-न्यारे हो गए और तहसील के जिम्मेदार खामोश बने रहे।
कब क्या हुआ
13 जुलाई 2020 को नीलामी सूचना जारी हुई।
10 अगस्त 2020 को नीलामी हुई।
दो सितंबर 2024 को प्रधान ने शिकायत दर्ज कराई।
10 नवंबर 2024 को लेखपाल ने रिपोर्ट दी।
20 नवंबर 2024 को एसडीएम ने रिपोर्ट भेजी।
शिकायत पर जांच के आदेश दिए थे। अभी जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। अगर जांच में शिकायत सही मिलती है तो तालाब आवंटन की प्रक्रिया से जुड़े रहे तत्कालीन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिस समिति ने इसका आवंटन हासिल किया है, उससे भी नियमानुसार रिकवरी कराई जाएगी। -एमपी सिंह, डीएम