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बिल्ला लगा स्वयं सहायता समूह का, यूनिफार्म साहब के चहेते की

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हरदोई। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को यूनिफार्म सिलवाकर वितरित किए जाने की योजना को विभागीय जिम्मेदारों ने ही पलीता लगा दिया। अधिकांश स्थानों पर नाम तो स्वयं सहायता समूहों का है, लेकिन यूनिफार्म की सप्लाई विभागीय अफसरों के चहेते सप्लायर्स ने ही की है। जनपद में तीन अलग-अलग स्थानों पर तो यूनिफार्म सिले जाने के साथ ही स्वयं सहायता समूहों के बिल्ले (कपड़े के स्टीकर) भी सिले जा रहे हैं।
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फाइलों और अभिलेखों में तो स्वयं सहायता समूहों के जरिये यूनिफार्म सिलवाकर वितरित करने का उल्लेख है, लेकिन हकीकत इसके ठीक उलट है। हर वर्ष यूनिफार्म की आपूर्ति विभाग को करने वाले सप्लायर्स (आपूर्तिकर्ताओं) ने बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों से सांठगांठ कर स्वयं सहायता समूहों से भी संपर्क साध लिया। इसके बाद सप्लायर्स ने ही स्वयं सहायता समूहों को बाकायदा बिल्ला लगी यूनिफार्म सप्लाई कर दी। मामला भुगतान को लेकर फंसा तो तय हुआ कि स्वयं सहायता समूह को जब चेक से भुगतान मिलेगा, तो एक निश्चित मूल्य काटकर सप्लायर को नगद वापस कर दिया जाएगा। संडीला, सुरसा, भरावन और सांडी में ये खेल बड़े पैमाने पर हुआ है, जबकि भरखनी, टोडरपुर, बावन में भी ऐसे ही कार्य हुआ है।
न्याय पंचायतवार लगी कमीशन की बोली
यूनिफार्म वितरण में सारा खेल कमीशन को लेकर है। सुरसा विकास खंड में न्याय पंचायतवार बाकायदा बोली लगी और विभागीय साहब की चहेती फर्म ने दबाव में भी बाजी मार ली। विभागीय अधिकारियों को अच्छे उपहार का वादा देकर चहेती फर्म ने काम हासिल कर लिया और इसी खेल के चलते स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने की योजना धड़ाम होती दिखी।
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सुई नहंीं पकड़ी पर सिली यूनिफार्म
कुछ ऐसे लोगों को भी सिलाई में शामिल किया गया, जिन्होंने कभी सुई तक नहीं पकड़ी। कुछ ऐसी महिलाओं के नाम से भी यूनिफार्म सिलना दिखाया गया, जिन्होंने कभी कपड़े की सिलाई की ही नहीं।
गाजियाबाद की फर्म पर मेहरबान हैं अफसर
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी जिस फर्म पर मेहरबान हैं वह गाजियाबाद की है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक आलाधिकारी की चहेती फर्म ने स्थानीय स्तर पर भी उन साहब की तैनाती होने के बाद ही पंजीकरण कराया है। इसमें स्थानीय शाखा महोलिया शिवपार में दिखाई गई है, लेकिन मौके पर काफी खोजने के बाद भी न तो दुकान मिली और न ही स्थानीय लोग ऐसी दुकान के बारे में बता पाए।
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