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डोंगा, नाव से नदी पार कर जाते वोट डालने

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सवायजपुर। रामगंगा नदी के कटान से प्रभावित ग्राम पंचायत बरहुली का गांव सांई करीब 15 वर्ष पहले दो पाटों में बंट गया था। आधी आबादी नदी के इस पार और आधी आबादी नदी के उस पार बसी है।
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गांव की आबादी करीब एक हजार और मतदाताओं की संख्या 406 है। इनमें से आधे-आधे वोटर रामगंगा के दोनों तरफ बसे हैं। पिछले कई चुनाव में गांव के एक ही हिस्से में मतदान बूथ बनता आ रहा है।
ऐसे में एक तरफ बसे लोगों को नाव और डोंगा से नदी पार कर या सड़क मार्ग से 40 किलोमीटर का चक्कर लगाकर दूसरी तरफ वोट डालने जाना पड़ता है।
इस बार भी 23 फरवरी को मतदान के दिन होने वाली वोटिंग को लेकर नदी पार कर वोटिंग करने वाले मतदाताओं का दर्द छलक रहा है।
हरपालपुर ब्लाक की ग्राम पंचायत बरहुली मजरा सांई की यूं तो दूरी तहसील मुख्यालय से महज सात किलोमीटर है, लेकिन गांव में कीचड़ भरी सड़कों से आवागमन में काफी दिक्कतें हैं।
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गांव के समीप बह रही रामगंगा नदी ने यहां के लोगों को वैसे ही तबाह कर दिया था। कटान से प्रभावित परिवार अभी भी सरकारी मदद की आस में हैं। रामगंगा ने सांई गांव को दो भागों में बांट दिया।
इनमें 406 मतदाता ऐसे हैं, जो नदी के दोनों तरफ रहते हैं। प्राथमिक विद्यालय सांई जिसमें बूथ संख्या 235 मतदान बूथ बनाया गया है, वह नदी के उस पार है।
इसके चलते इस पार के लोगों को लोकसभा चुनाव की तरह ही पहले की तरह नाव से रामगंगा नदी पार करनी होगी। उसके बाद छह किमी का सफर तय करके ही मतदान केंद्र तक पहुंच सकेंगे।
लगाना पड़ता है 40 किमी का चक्कर
सांई गांव के लिए बनाए गए मतदान केंद्र के लिए आधी आबादी नदी के उस पार है। ऐसे में यदि नदी पार किए बिना मतदान केंद्र पहुंचने के लिए करीब 40 किमी का चक्कर लगाना पड़ता है।
मतदाता हुल्लापुर-जैनापुर-फर्रुखाबाद होते हुए 40 किमी दूरी ट्रैक्टर-ट्रॉली से तय सफर करें, तभी सड़क मार्ग से पहुंच सकते हैं। ऐसे में नदी पार कर करीब सात किमी की दूरी तय करना वोटरों को नजदीक लगता है।
ये है मतदाताओं की व्यवस्था
बीएलओ गीता ने बताया कि बूथ संख्या 235 पर 406 वोटरों में महिलाएं 186, पुरुष 220 और 80 साल से ऊपर के छह मतदाता हैं। यह सब अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र मजबूत करते हैं।
यह सही है कि नदी पार जाकर मतदान करने की दिक्कतें हैं। पहले 20-25 फीट ऊंची रामगंगा की तलहटी से उतरकर नाव पर बैठेंगे, फिर छह किमी पैदल चलकर बूथ तक पहुंचेंगे। वहीं पोलिंग पार्टियां भी 40 किमी का चक्कर काटकर मतदान कराने पहुंचेंगी।
गांव में कोई प्रत्याशी किसी भी चुनाव में वोट मांगने भले न आए, लेकिन वह लोग लोकतंत्र की खातिर वोट जरूर डालते हैं। इसके लिए नदी पार कर जाना पड़ता है। गांव में किसी भी तरीके की कोई सुविधा नहीं है। वोटर लिस्ट में नाम बना रहे, उनकी पहचान बनी रहे, इसलिए वोट डालने जाते हैं।
- रति पाल सिंह, रिटायर्ड लेखपाल, सांई
गांव वाले मतदान वाले दिन नाव का सहारा ही लेते हैं। पैदल चलने में काफी दिक्कतें होती हैं। जिसके चलते वह चाह कर भी वह मतदान करने भी नहीं जाते हैं।
-नन्हे
नदी पार स्थित प्राथमिक विद्यालय में बूथ होने से वोट डालने में पूरा दिन निकल जाता है, परेशानी अलग होती है। जिला प्रशासन से मतदाताओं के लिए बस इत्यादि का प्रबंध कराने की मांग की।
- शकुंतला, गृहिणी
ग्रामीणों द्वारा मांग करने के बाद भी इधर बूथ की व्यवस्था न होने से 23 फरवरी को भी नदी पार करके वोट डालने जाना पड़ेगा। गांव की मुख्य सड़कों पर कीचड़ होने से नदी तक पहुंचने में भी दिक्कतें हैं।
-इंद्रेश
मामला संज्ञान में आया है। अब नदी के इस पार बूथ की व्यवस्था निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में जल्द संभव नहीं है, फिर भी जो संभव होगा मदद की जाएगी, ताकि मतदाताओं को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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- स्वाति शुक्ला, एसडीएम
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