हरदोई। जिले में कैंसर के संदिग्ध मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बनती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कराई गई जांच में बीते पांच माह के अंतर्गत जिले में 1,770 कैंसर के संदिग्ध मरीज चिह्नित किए गए। इनमें सबसे अधिक मुख कैंसर के मरीजों को चिह्नित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग से कराई गई स्क्रीनिंग में मरीजों के मिलने के बाद उन्हें उपचार के लिए हायर सेंटरों में रेफर किया गया है।
मुख कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला, बीड़ी और सिगरेट कैंसर का बड़ा कारण है। अधिक शराब का सेवन, मुंह की साफ-सफाई का अभाव, लंबे समय तक रहने वाली चोट और कुछ मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण भी जोखिम बढ़ा सकता है। मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवम यादव बताते हैं कि मुख कैंसर आमतौर पर मुंह की सतह पर एक छोटे घाव या धब्बे के रूप में शुरू होता है। समय पर उपचार न किया जाए तो ऊतकों में फैल सकता है और बाद में गर्दन की लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) तक पहुंच जाता है। शुरुआती अवस्था में पहचान सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा स्तन में गांठ या असामान्य रक्तस्राव जैसे लक्षण में कैंसर का डर रहता है।
1,770 कैंसर के संदिग्ध मरीज चिह्नित
स्वास्थ्य विभाग की तरफ से गैर संचारी रोग कार्यक्रम के तहत करवाई गई स्क्रीनिंग में पांच माह में ओरल कैंसर के 1,067, ब्रेस्ट कैंसर के 386 और सर्वाइकल कैंसर के 317 संदिग्ध मरीज मिले। यानी कुल रेफर मरीजों में आधे से अधिक मामले मुख कैंसर से जुड़े हैं। ब्लॉकवार आंकड़ों में टोडरपुर सबसे आगे रहा वहां 194 संदिग्ध मरीज चिह्नित हुए। इसके बाद कोथावां में 113, अहिरोरी में 73, सुरसा में 71 और माधौगंज में 65 मरीज मिले।
ऐसे लक्षणों पर देना चाहिए ध्यान
-मुंह का छाला या घाव जो ठीक न हो।
-मुंह, जीभ या मसूड़ों पर सफेद, लाल या लाल-सफेद धब्बे दिखाई देना।
-जीभ या गाल के अंदर गांठ या कठोरपन महसूस होना।
-चबाने, निगलने या मुंह खोलने में कठिनाई होना।
-गर्दन में गांठ महसूस होना।
महिलाओं में बढ़ रहा स्तन कैंसर
मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. अरविंद शर्मा बताते हैं कि महिलाओं में मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, समय से पहले माहवारी शुरू होना, संतान न होना, बच्चे को स्तनपान न करा पाना, धूम्रपान, शराब का सेवन और परिवार में किसी को स्तन कैंसर होना इसका प्रमुख कारण हैं। जिन महिलाओं के परिवार में पहले किसी सदस्य को स्तन कैंसर हो चुका है उनमें इसका खतरा अधिक रहता है। अगर प्रथम चरण में स्तन कैंसर की पहचान हो जाती है तो इससे घबराने की कोई जरूरत नहीं है। इस तरह के कैंसर को पूर्ण रूप से ठीक किया जा सकता है।
कैंसर-डे में दी जा रही सुविधा
मेडिकल कॉलेज में कैंसर के मरीजों की सुविधा के लिए डे-केयर सेंटर का संचालन कर दिया गया है। इसमें मरीजों को दवाएं चढ़ाई जा रही हैं। बता दें कि कैंसर डे केयर सेंटर में भी संचालन के बाद अभी तक करीब पांच मरीजों को रखकर उन्हें दवाएं चढ़ाई गईं। प्रधानाचार्य डॉ. जेबी गोगोई ने बताया कि जानकारी होने के बाद कैंसर डे केयर में मरीज आ रहे हैं।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में भर्ती होते मरीज
कैंसर डे-केयर सेंटर में जिले के विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की निगरानी में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। इसमें दो विशेषज्ञ चिकित्सकों में महिला रोग विभागाध्यक्ष सहायक आचार्य डॉ. मधुलिका शुक्ला व सर्जरी विशेषज्ञ सहायक आचार्य डॉ. अरविंद कुमार शर्मा शामिल हैं। संचालन के लिए बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. मेधा गुप्ता को नोडल अधिकारी भी बनाया गया है। इसके अलावा तीन कर्मियों का नर्सिंग स्टाफ है। कैंसर डे केयर सेंटर में मरीजों को दवाएं चढ़ाने के साथ ही संदिग्ध मरीजों की बायोप्सी जांच के लिए नमूना लिया जाता है। जिसे हायर सेंटर भेजकर जांच कराई जाती है।
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मुख्यमंत्री राहत कोष से मिलती है मदद
कैंसर मरीजों के लिए वैसे तो मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं अभी कम हैं लेकिन मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद मरीजों को काफी राहत देती है। इसमें आवेदन करने के बाद मरीजों को उपचार के लिए धनराशि दी जाती है।