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आग की लपटों में दफन कई अरमान

Sun, 17 May 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरदोई
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करीमनगर गांव में शुक्रवार रात लगी आग से जहां 36 घर जलकर राख हो गए, वहीं अग्निकांड के बाद प्रभावित गरीब लोग खुले आसमान के नीचे आ गए हैं। उनके पास सिर छुपाने को जगह नहीं बची और न ही खाने का अन्न बचा। तन पर पहने कपड़ों के सिवा कोई कपड़े भी नहीं बचे।
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कई घरों में शादी के लिए रखे हजारों रुपये व दहेज का सामान जलकर खाक हो गया। इसके अलावा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि गांव नहीं पहुंचे थे, अलबत्ता प्रशासनिक अफसरों ने जरूर गांव पहुंच कर हालात देखे और कार्रवाई की। ज्ञात हो कि शुक्रवार की शाम एक खेत में फसल काटने के बाद लगाई गई आग ने कई घरों में भारी तबाही मचाई थी।

रात में कई घर जलने से गांव के उस हिस्से में हाहाकार मचा रहा, जहां से लपटें उठ रही थीं। सूचना पर एएसपी व सीओ समेत अन्य अफसर और आसपास के थानों का फोर्स और फायर ब्रिगेेड की गाड़ी के साथ पहुंच कर आग पर काबू पाया था।
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अग्निकांड के प्रभावित लोग शनिवार को चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे पनाह लिए नजर आए। इनके सामने फिलहाल सबसे बड़ी समस्या रहने को मकान और पहनने को कपड़ों का इंतजाम करना है। शुक्रवार शाम आग लगने से शनिवार खबर लिखे जाने तक पिहानी कसबे से कई लोग खाना लेकर पहुंचे, जिन्हें प्रभावित लोग दुआएं दे रहे हैं।

गांव वालों ने बताया कि इस अग्निकांड में कई पालतू पशु-पक्षी जिंदा जल गए। नसीम (28) के हाथ झुलस गए, वहीं नवाबू की बेटी की शादी होने वाली थी। यहां तकरीबन तीस हजार रुपये की नगदी समेत दहेज के लिए रखे जेवर, कपड़े व अनाज जलकर राख हो गए। लल्लन की बेटी भी शादी के अरमान सजाए बैठी थी।

यहां भी करीब 50 हजार की नगदी, जेवर, कपड़े व अनाज आदि जल गए। लल्लन जनरल स्टोर की दुकान चलाते हैं। फेरी भी लगाते हैं। उनका सामान घर में रखा था। आग में जल कर सब खत्म हो गया। शब्बीर के यहां उनके बेटे व बेटी दोनों की शादी अगले माह होने वाली थी, पर आग की लपटों ने तमाम तैयारियों को लील लिया।

यहां भी परिजनों ने सामान, अनाज व नगदी जलने का दर्द बयां किया। घर में बचा तो सिर्फ कालिख और धुआं। किश्वरी ने बताया कि उनके घर में बकरी और दो मुर्गे जिंदा जल गए। इसी तरह लल्लन के यहां कबूतर जिंदा जल गए। छेद्दन के बेटे लड्डन की शादी होना थी, तैयारियां चल रही थीं। सामान इकट्ठा किया जाने लगा था। आग ने सब को एक पल में खाक में बदल दिया। प्रभावित लोगों में से ज्यादातर लोग दिल्ली में मेहनत मजदूरी करते हैं।
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