हरदोई। कोरोना काल में फसल बेचने में आ रही दुश्वारियों को देख बीटेक के छात्र ने किसानों के लिए वेब पोर्टल बना दिया। पोर्टल पर किसान अपनी उपज के बारे में आसानी से जानकारी दे सकें, इसके लिए मैसेजिंग सिस्टम को आसान बनाया गया है।
किसान कीपैड वाले साधारण मोबाइल से भी उपज की जानकारी पोर्टल पर अपलोड कर सकेंगे। सांडी के इस युवा की सोच को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी) और जापान की कियो यूनिवर्सिटी को भी सराहा।
बैंगलोर स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस की ओर से आयोजित सोशल इनोवेशन चैलेंज में इसे देश में तीसरा पुरस्कार मिला है। कियो यूनिवर्सिटी ने उसे रिसर्च का मौका भी दिया है। अब आईआईएससी ही इस पोर्टल प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाएगा।
सांडी कस्बे के मोहल्ला नौसहरा निवासी अजीम हुसैन खां बंगलूरू स्थिति दयानंद सागर कॉलेज आफ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटर साइंस में बीटेक के छात्र हैं। कोरोना काल में कॉलेज बंद हुआ तो नौसहरा स्थित मकान में रहकर पढ़ाई करने लगे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि यहां के किसानों को फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।
अलग-अलग किसानों से बात की तो पता चला कि ज्यादातर किसान स्थानीय मंडी में औने-पौने दामों पर ही उपज बेचने को मजबूर हैं। इसकी बड़ी वजह किसानों का साक्षर न होना भी है। किसानों की मदद के उद्देश्य से उन्होंने ऑनलाइन वेब पोर्टल बनाया। इसमें मैसेजिंग सिस्टम भी जोड़ा।
यानी पोर्टल से जुड़ने के लिए किसान के पास एंड्रायड फोन जरूरी नहीं है। साधारण कीपैड फोन से एसएमएस करने पर भी किसान की उपज के बारे में पोर्टल पर जानकारी पहुंच जाएगी। इसी बीच दिसंबर 2020 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और कियो यूनिवर्सिटी जापान ने संयुक्त रूप से सोशल इनोवेशन चैलेंज का आयोजन किया।
देश भर से लगभग 1200 छात्रों ने इसमें प्रतिभाग किया। 21 जनवरी को परिणाम घोषित हुए तो अजीम को तीसरा स्थान मिला। उन्हें 10 हजार रुपये पुरस्कार के साथ ही जापान में रिसर्च का मौका भी मिला है। अजीम कहते हैं कि किसानों को उनकी फसलों का वाजिब मूल्य मिलना जरूरी है। किसानों की मदद के लिए ही उन्होंने पोर्टल बनाया। इसे इनोवेशन चैलेंज में पुरस्कृत किया गया है।
उन्नाव के पुरवा में नायब तहसीलदार हैं अजीम के पिता
अजीम हुसैन खां के पिता अखलाक हुसैन खां इन दिनों उन्नाव जिले की पुरवा तहसील में नायब तहसीलदार के पद पर तैनात हैं। अजीम की मां मुजलशुन बेगम गृहिणी हैं। अजीम तीन बहनों के बीच अकेला भाई है। हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई माधौगंज के लखनऊ पब्लिक स्कूल से की है।
चार दौर के बाद हुआ चयन
प्रतियोगिता का आयोजन चार चरणों में किया गया। पहले चरण में आइडिया मांगा गया। आइडिया चयनित होने पर प्रस्तुतीकरण का मौका दिया गया। इसमें सफलता मिलने पर प्रोटोटाइप यानी पूरे आइडिया को अमल में लाकर सैंपल रूप में दिखाया गया। चौथे चरण में अप्रूवल टेस्टिंग हुई और फिर पुरस्कार की घोषणा की गई।