हरदोई/भरावन। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) भरावन पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद मरीजों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। यहां जांच से लेकर इलाज तक की व्यवस्था चरमराई हुई है। न तो आवश्यक जांच सामग्री उपलब्ध है न ही दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता है। जांच के लिए मरीजों को मजबूरी में निजी लैब और दवाओं के लिए मेडिकल स्टोर तक दौड़ लगानी पड़ रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए ब्लॉक स्तर पर हर साल बजट जारी किया जाता है। वर्ष 2025-26 में सीएचसी भरावन को 79.22 लाख रुपये मिले हैं। इसके बावजूद सीबीसी, एलएफटी, केएफटी, लिपिड प्रोफाइल जैसी महत्वपूर्ण जांचें ठप हैं क्योंकि जांच के लिए आवश्यक डिस्टिल्ड वाटर (आसुत जल) नहींं है।
बता दें कि डिस्टिल्ड वाटर का प्रयोग जांच मशीनों के पाइप की सफाई के लिए किया जाता है। बिना पाइप की सफाई के दूसरे रक्त नमूने की जांच नहीं हो सकती है। महत्वपूर्ण जांचें न होने की वजह से मरीजों को निजी लैबों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। दर्द दूर करने के लिए ट्यूब बीते कई दिनों से नहीं हैं और खांसी के लिए भी सिरप न होने से मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। सीएचसी पर रोजाना तीन सौ से चार सौ मरीजों के आने का दावा किया जाता है लेकिन व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को मेडिकल कॉलेज रेफर किया जा रहा है।
चिकित्सकों की भी कमी
हरदोई। सीएचसी पर अधीक्षक डॉ. अरविंद मिश्र के अतिरिक्त केवल बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. निखिल वर्मा, महिला चिकित्सक डॉ. अस्मिता, आयुष चिकित्सक डॉ. पिंकी और डॉ. मनीष के अतिरिक्त फार्मासिस्ट शैलेंद्र और एक टेक्नीशियन तैनात हैं। अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। मामूली सर्दी और जुकाम की दवा तो मिल जाती है लेकिन गंभीर स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल भेजा जा रहा है।
30 बेड के चिकित्सालय में सालों से बंद लिफ्ट
हरदोई। भरावन सीएचसी पर महिलाओं के लिए 30 बेडों का संयुक्त चिकित्सालय भी मौजूद है। इसमें महिलाओं का प्रसव कराया जाता है। गर्भवती महिलाओं की सुविधा के लिए अस्पताल में ऊपर आने-जाने के लिए लिफ्ट लगाई है लेकिन यह बीते कई सालाें से बंद पड़ी है। सीएचासी अधीक्षक तक का कहना है कि जब से वह यहां नियुक्त हुए हैं। लिफ्ट बंद है और महिलाओं को रैंप और सीढि़यों से ही आना जाना पड़ता है।
दवा मिली लेकिन जांच नहीं हुई
केस-1- अजमतपुर निवासी शांति देवी ने बताया कि खांसी और बुखार आ रहा है। काफी कमजोरी भी है। चिकित्सकों ने दवा तो दी है, जांच कराने के लिए कहा तो मना कर दिया गया।
केस-2- गांव भैसासुर निवासी रतनलाल ने बताया कि काफी दिन से खांसी आ रही थी जांच कराने पर टीबी निकला है। दवा तो मिली है लेकिन पूरी दवाएं और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
रक्त नमूनोंं की जांच के लिए डिस्टिल्ड वाटर की डिमांड करीब 20 दिन पहले भेजी जा चुकी है। दवाओं के लिए भी डिमांड की जा चुकी है। दोबारा रिमाइंडर भेज कर जल्दी ही उपलब्धता कराई जाएगी। -डॉ. अरविंद मिश्रा, सीएचसी अधीक्षक
फोटो- 10- शांति देवी। संवाद
फोटो- 10- शांति देवी। संवाद