सावन मास में इन दिनों चहुंओर आस्था की गंगा बहती नजर
आ रही है। कांवड़ियों के कंधों पर कांवड़ है तो पैदल चलते चलते पांव में
छाले तक नजर आने लगे हैं। फिर भी बम-बम भोले कहते कहते कांवड़ियों के
जत्थों का शिवालयों की ओर बढ़ने का क्रम लगातार जारी है।
रविवार को भी
दिन भर शहर के मार्गों पर बम-बम भोले के जयघोष सुनाई दिए। इन दिनों सावन
माह चल रहा है। सावन के आते ही हर जगह भोले की गूंज सुनाई देनी लगी हैं।
मंदिरों में शिव के दर्शन को जहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखने लगी
हैं, वहीं मार्गों पर कांवड़ियों के गाते नाचते जत्थे भी दिखने लगे हैं।
सबसे ज्यादा जत्थे एक साथ शहर से बिलग्राम मार्ग पर देखने को मिल रहा है।
जहां पैदल या वाहनों पर चढ़कर कावड़िए राजघाट की ओर जाते दिखाई देते हैं।
ज्ञात हो कि श्रद्धालुओं द्वारा राजघाट से गंगा जल लेकर शिवालयों की तरफ
अपना रुख किया जाता है।
कोई जत्था भगवान भोले के जयकारों को लगाते हुए अपनी
यात्रा को पूरा कर रहा, तो कोई जत्था डीजे साउंड पर शहर के मुख्य मार्गों
पर थिरक कर रवाना हो रहा है। सावन मास शुरू होते ही भगवान भोले के
श्रद्धालु अपनी ही धुन में दिखाई देते हैं। सबसे पहले श्रद्धालु अलग-अलग
साधनों से जत्थों के रूप में राजघाट गंगा जल लेने जाते हैं।
उसके बाद गंगा
जल को लेने के बाद कांवड़ियों के जत्थे मानी गई मिन्नतों के चलते अलग-अलग
शिवालयों की ओर कूच करते हैं। पुराने लोगाें का कहना है कि जिले से
कांवड़िए सबसे ज्यादा सकारा मंदिर, गोला गोकर्णनाथ आदि के शिवालयों की ओर
जाते हैं।
कु ल मिलाकर बम-बम के उद्घोष से माहौल शिवमय हो गया है। रविवार
को निकले कांवड़ियों में नवीन गल्ला मंडी के व्यापारियों द्वारा निकली
यात्रा भी प्रमुख रही। जिसमें भक्तों के अलावा सजीव शंकर पार्वती एवं
श्रीकृष्ण राधा की सजीव झांकियाें ने भी लोगों को आकर्षित किया।