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बंदी तो हुई पर सड़कों का बोझ न कम हो सका

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हरदोई। व्यापारिक संगठनों के आह्वान पर सोमवार को शहर की बाजारों में बंदी रही। कपड़ा, सराफा सहित बड़े-बड़े शोरूमों के शटर डाउन रहे। लेकिन शहर की सड़कों पर भीड़ में कमी नहीं आई। छोटे दुकानदारों ने कहा कि भीड़ नहीं रुकी तो ऐसी बंदी से क्या फायदा। हमें तो नुकसान ही होगा।
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व्यापारिक संगठनों ने मिलकर 20 जुलाई से 26 जुलाई तक की बंदी की सिफारिश जिलाधिकारी से की थी, जिसे प्रशासन ने रविवार को स्वीकार कर लिया। हालांकि प्रशासन ने बंदी को लेकर कोई पत्र जारी नहीं किया था। ऐसे में बड़े-बड़े दुकानदारों ने तो दुकानें नहीं खोलीं पर छोटे व्यवसायी डरते डराते दुकान का आधा शटर खोले रहे। शहर के प्रमुख मार्गों सदर बाजार, सिनेमा रोड, रेलवेगंज में दुकानें बंद रहीं। नुमाइश चौराहे, रेलवेगंज का कुछ हिस्सा, धर्मशाला रोड, मुन्ने मियां चौराहे सहित कई जगह दुकानें बंद दिखीं। व्यापारियों में बंदी को लेकर कुछ मतभेद भी नजर आया। किसी ने बंदी को उचित ठहराया तो किसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सिर्फ दुकान बंद होने से कोरोना संक्रमण कम नहीं होगा। सड़कों पर भीड़ रही।
ऐसी बंदी किस काम की : विमलेश
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष विमलेश दीक्षित इस बंदी से नाखुश दिखे। उनका कहना था कि भीड़ प्रशासन द्वारा रोकी नहीं गई तो सिर्फ बाजार बंद करके दुकानदारों का शोषण व्यापार मंडल क्यों करे। उन्होंने बताया कि मंगलवार की बंदी है। सोमवार जैसे ही बंदी होनी है तो वह बुधवार से बंदी नहीं चाहेंगे। ऐसी बंदी वह नहीं चाहते जिससे संक्रमण को भी न रोका जा सके और उनके गरीब दुकानदार रोजी-रोटी को तरस जाएं। व्यापारियों के हित को देखकर फिर से निर्णय लिया जाएगा।
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..जब ईओ ने किया दुकानदारों से निवेदन
नुमाइश चौराहे पर किराना के साथ-साथ मिठाई की दुकानें भी खुली नजर आईं। नगर पालिका के ईओ रविशंकर शुक्ल ने भी बाजार का भ्रमण किया। उन्होंने खुली दुकानों को देखकर उनसे व्यापारिक संगठनों का हवाला देकर दुकानें बंद कराईं। उनके जाते ही फिर से आधे शटर ऊपर हो गए।
चालान कैसे कट सकता!
जब प्रशासन ने बंदी को लेकर सिर्फ सहमति दी कोई आदेश जारी नहीं किया तो फिर खुली दुकान देखकर नगर पालिका चालान कैसे कर सकती है। ये प्रश्न आम दुकानदारों की जुबां से लेकर सोशल साइटों तक पर दिखा। इस संबंध में नगर पालिका के ईओ रविशंकर शुक्ला से जब पूछा गया तो उनका कहना था कि बंदी व्यापार मंडल के आह्वान पर थी। हम अनुरोध करके दुकानें बंद करा सकते, चालान नहीं काट सकते।
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