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Hardoi News: शुरू होने से पहले ही बदहाल होती जा रही बावन की पब्लिक हेल्थ यूनिट

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हरदोई/बावन। ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए बावन ब्लाॅक में बनी पब्लिक हेल्थ यूनिट संचालित होने से पहले ही बदहाल होने लगी है। बीते एक साल से बनकर तैयार खड़ी पब्लिक हेल्थ यूनिट में अभी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यूनिट में चढ़ने के लिए लगी रैंप की रेलिंग भी टूटने लगी है। वहीं, यूनिट के अंदर रखी लाखों की मशीनें भी धूल फांक रही हैं।
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15वें वित्त आयोग व प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रांस्ट्रक्चर मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में जांच और इलाज से संबंधित सुविधाएं बढ़ाने के लिए सभी सीएचसी पर बीपीएचयू यूनिट स्थापित की गई हैं। प्रत्येक भवन के निर्माण पर 48 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन समय बीतने के बाद अभी तक यूनिटें शुरू ही नहीं हुईं। बावन विकास खंड में सीएचसी पर एक वर्ष गुजरने के बाद भी ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट की बिल्डिंग में ताला लगा है।
देखरेख के अभाव में भवन भी खस्ताहाल होने लगा है। यूनिट के अंदर जाने के लिए बने रैंप की रेलिंग तक टूट गई है। बीते एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी लोगों को सहूलियत न मिलने से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए जिला मुख्यालय या फिर निजी लैबों पर जाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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सात लाख की बायोकेमेस्ट्री मशीन फांक रही धूल
हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी की कोशिशें तो हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही से यह कोशिशें परवान नहीं चढ़ पा रहीं। शहर से बमुश्किल 10 किलोमीटर दूर बावन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगभग सात लाख रुपये से खरीदी गई बायोकेमेस्ट्री मशीन शोपीस बनी रखी है। मशीन का इस्तेमाल तो दूर की बात अभी इसका कवर तक नहीं हटा है। सीएचसी में मशीन आए नौ माह हो गए, लेकिन ग्रामीणों और मरीजों की उम्मीद पूरी नहीं हुई। वजह यह कि मशीन का इस्तेमाल ही शुरू नहीं किया गया।



बायोकेमेस्ट्री मशीन से होती हैं यह जांचें
बायोकेमेस्ट्री मशीन से एक साथ कई जांचें की जा सकती हैं। इसके लिए रक्त का नमूना लेना होता है। लिपिड प्रोफाइल, यूरिक एसिड, लिवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर आदि की जांचें इस मशीन से होती हैं।






पब्लिक हेल्थ यूनिट में बिजली का कनेक्शन न होने के कारण संचालित नहीं हो पा रही थी। कनेक्शन हो गया है, लेकिन जांच मशीनें ऐसी हैं जिनको एयर कंडीशन वातावरण में रखना होता है। ऐसी अभी नहीं है, लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि सीएचसी से व्यवस्था कराई जा रही है। सामान शिफ्ट कराया जा रहा है, कुछ जांच भी की गई हैं। टूटी रेलिंग बनवाने के निर्देश भी दिए गए हैं। यूनिट अब जल्द शुरू हो जाएगी।
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-डॉ. पंकज मिश्रा, अधीक्षक, सीएचसी बावन
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